गणतंत्र हर तूफान से गुजरा हुआ है पर तिरंगा प्यार से फहरा हुआ है जिन्दगी के साथ में चलते ही जाना, हर गरीबी बेबसी में ढूँढ पाना; अपने जीने का बहाना जंग की कठिनाइयों से उबर आना फिर किसी परिणाम तक जाने का रस्ता एक बनाना दर्द में विश्वास-सा ठहरा हुआ है। यह तिरंगा प्यार से फहरा हुआ है। कितना पाया और क्या खोया इस गणित में कैसा जाना स्वर्ण-चिड़िया उड़ गयी तो कैसा उसका दुख मनाना ताल दो मिलकर कि कलयुग में नया भारत बनाना सिर उठाना गर्व से जय हिन्द गाना मुश्किलों की धूप में ईमान-सा गहरा हुआ है। यह तिरंगा प्यार से फहरा हुआ है।
Join 4M+ learners. Unlock unlimited quizzes, wrong-answer tracking, flashcards + reminders, study guides, and 1-on-1 challenges.