राजस्थान की धरती पर हुई यह जलक्रांति एक-दो नहीं करीब पन्द्रह सालों के कड़े संघर्ष और समाज की अथक मेहनत का नतीजा है। इस जलक्रांति को संभव बनाने में केंद्रीय भूमिका रही राजेन्द्र सिंह की। इनके प्रयासों की सुन्दर और अनूठी मिसाल हैं वे पाँच नदियाँ; जो दो दशक पहले सूख गई थीं, पर अब सदानीरा हो गई हैं। पारम्परिक तरीके से जल-प्रबन्धन का अद्भुत उदाहरण पेश करती इन नदियों ने कितने ही गाँवों की तस्वीर बदलकर रख दी है। अखरी, रुपारेल, सरसा, भगाणी और जहाज वाली नदी में फिर से बहता पानी इन गाँव के लोगों के जुझारू चरित्र का अद्भुत प्रमाण है। अलवर जिले में अपनी मेहनत से सूखी नदियों को फिर से पानीदार बनाने वाले... Show more राजस्थान की धरती पर हुई यह जलक्रांति एक-दो नहीं करीब पन्द्रह सालों के कड़े संघर्ष और समाज की अथक मेहनत का नतीजा है। इस जलक्रांति को संभव बनाने में केंद्रीय भूमिका रही राजेन्द्र सिंह की। इनके प्रयासों की सुन्दर और अनूठी मिसाल हैं वे पाँच नदियाँ; जो दो दशक पहले सूख गई थीं, पर अब सदानीरा हो गई हैं। पारम्परिक तरीके से जल-प्रबन्धन का अद्भुत उदाहरण पेश करती इन नदियों ने कितने ही गाँवों की तस्वीर बदलकर रख दी है। अखरी, रुपारेल, सरसा, भगाणी और जहाज वाली नदी में फिर से बहता पानी इन गाँव के लोगों के जुझारू चरित्र का अद्भुत प्रमाण है। अलवर जिले में अपनी मेहनत से सूखी नदियों को फिर से पानीदार बनाने वाले गाँव के मेहनतकश लोगों ने इन्हें अपनी सम्पत्ति मान लिया है। Show less
राजस्थान की धरती पर हुई यह जलक्रांति एक-दो नहीं करीब पन्द्रह सालों के कड़े संघर्ष और समाज की अथक मेहनत का नतीजा है। इस जलक्रांति को संभव बनाने में केंद्रीय भूमिका रही राजेन्द्र सिंह की। इनके प्रयासों की सुन्दर और अनूठी मिसाल हैं वे पाँच नदियाँ; जो दो दशक पहले सूख गई थीं, पर अब सदानीरा हो गई हैं। पारम्परिक तरीके से जल-प्रबन्धन का अद्भुत उदाहरण पेश करती इन नदियों ने कितने ही गाँवों की तस्वीर बदलकर रख दी है। अखरी, रुपारेल, सरसा, भगाणी और जहाज वाली नदी में फिर से बहता पानी इन गाँव के लोगों के जुझारू चरित्र का अद्भुत प्रमाण है। अलवर जिले में अपनी मेहनत से सूखी नदियों को फिर से पानीदार बनाने वाले गाँव के मेहनतकश लोगों ने इन्हें अपनी सम्पत्ति मान लिया है।
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