हम जियें या न जियें जो लोग कल को जाएँगे हम उनको क्या दे जाएँगे ये बात दिल में है अगर-" ऐ दोस्त कुछ तो कर गुजर…ऐ दोस्त कुछ तो कर गुजर ढल रहा है दिन तो क्या ये रात भी ढलेगी कल तू आज इस अँधेरी रात में मशाल बन के जल तू चल किसी भी रास्ते नई सुबह के वास्ते खुद ही बना के रास्ता तू ही दिखा नई डगर… तू देख पंछियों की तरह उड़ के सारा आसमान देख हर दरख्त पर से घोंसलों के दरमियान देख हर दरख्त को ताज और तन को तू देख चिमनियों के बीच में धुआँ-धुआँ शहर… गुजर गया जो कल तू उस पे इस तरह न हाथ मल दिल के हर गुबार को न दिल में इस तरह कुचल
Join 4M+ learners. Unlock unlimited quizzes, wrong-answer tracking, flashcards + reminders, study guides, and 1-on-1 challenges.