गाँव हो रहे शहर हमारे, बाकी सब कुछ अच्छा है रिश्ते अब व्यापार हो रहे, बाकी सब कुछ अच्छा है। उत्पादन में बढ़त हो रही, खेतों से खलिहानों तक फिर भी भूखे बढ़ते जाते, बाकी सब कुछ अच्छा है। चौड़ी सड़कें पक्की गलियाँ औ बिजली की जगमग में दिल की दूरी बढ़ती जाती, बाकी सब कुछ अच्छा है। चौपालों की मीठी बातें दूरदर्शनी संस्कृति में तीज और त्योहार खो रहे, बाकी सब कुछ अच्छा है। कोर्ट-कचहरी, आफिस, थाने, मोटर-गाड़ी, अफसर से अमन चैन के दिवस हिराने, बाकी सब कुछ अच्छा है। घर से आयी जब ये पाती कि यहाँ हालत बदल गई दिल की धड़कन और बढ़ गई बाकी सब कुछ अच्छा है।
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