Uttar Pradesh UPPSC Previous Papers - CSAT Paper 2 2012 — Flashcards | U.P. State Government Jobs | FatSkills

Uttar Pradesh UPPSC Previous Papers - CSAT Paper 2 2012 — Flashcards

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निर्देश : निम्नलिखित अवतरण को ध्यान से पढ़िए तथा प्रश्न सं. 1 से 4 के उत्तर अवतरण के आधार पर दीजिए। ईष्र्या में प्रत्यत्नोपादिनी शक्ति बहुत कम होती है। उसमें वह वेग नहीं होता जो क्रोध आदि में होता है क्योंकि आलस्य और नैराश्य के आश्रय से तो उसकी उत्पत्ति ही होती है। जब आलस्य और नैराश्य के कारण अपनी उन्नति के प्रयत्न करना तो दूर रहा‚ हम अपनी उन्नति का ध्यान तक मन में नहीं ला सकते‚ तभी हारकर दूसरे की स्थिति की ओर बार-बार देखते हैं और सोचते हैं कि यदि उसकी स्थिति न होती तो हमारी स्थिति जैसी है वैसी रहने पर भी बुरी न दिखाई देती। अपनी स्थिति को ज्यों की त्यों रखकर सापेक्षिकता द्वारा सन्तोष-लाभ करने का ढीला यत्न आलस्य और नैराश्य नहीं है तो और क्या है? जो वस्तु उज्जवल नहीं है उसे मैली वस्तु के पास रखकर हम उसकी उज्जवलता से कब तक और कहाँ तक सन्तोष कर सकते हैं? जो अपनी उन्नति के प्रयत्न में बराबर लगा रहता है उसे न तो नैराश्य और न ही हर घड़ी दूसरे की स्थिति से अपनी स्थिति के मिलान करते रहने की फुरसत। ईष्र्या की सबसे अच्छी दवा है उद्योग और आशा। जिस वस्तु के लिए उद्योग और आशा निष्फल हो उस पर से अपना ध्यान हटाकर दृष्टि की अनन्तता से लाभ उठाना चाहिए। जिससे ईष्र्या की जाती है उस पर उस ईष्र्या का प्रभाव क्या पड़ता है यह भी देख लेना चाहिए। ईष्र्या अप्रेष्य मनोविकार है। किसी मनुष्य को अपने से ईष्र्या करते देख हम भी बदले में उससे ईष्र्या नहीं करने लगते। दूसरे को ईष्र्या करते देखकर हम उससे घृणा करते हैं। दूसरे की ईष्र्या का फल भोग कर हम उस पर क्रोध करते हैं जिसमें अधिक अनिष्टकारिणी शक्ति होती है। अत: ईष्र्या ऐसी बुराई है जिसका बदला यदि मिलता है तो कुछ अधिक ही मिलता है। इससे इस बात का आभास होता है कि प्रकृति के कानून में ईष्र्या एक पाप या जुर्म है। अपराधी ने अपने अपराध से जितना कष्ट दूसरे को पहुँचाया‚ अपराधी को भी केवल उतना ही कष्ट पहुँचाना सामाजिक न्याय नहीं है‚ अधिक कष्ट पहुँचाना न्याय है‚ क्योंकि निरपराध व्यक्ति की स्थिति को अपराधी की स्थिति से अच्छा दिखलाना न्याय का काम है।
1. ईष्र्या का सबसे अच्छा उपचार है कि
आशापूर्ण ढंग से अपना उद्योग किया जाए।
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