स्थापना [A] : तुलसी के मत में-'निर्गुण रूप सुलभ अति‚सगुन जान नहि कोई। सुगम अगम नाना चरित‚ सुनि मुनि-मन भ्रम होई॥' तर्क [R] : क्योंकि सगुण साकार को उपासना और अनुभव के दायरे में लाना सहज है‚ जबकि निर्गुणनिराकार की उपासना और अनुभूति नितान्त कठिन।

🎲 Try a Random Question  |  Total Questions in Quiz: 1707  |  🧠 Study this quiz with Flashcards
This question is part of a full practice quiz:
UGC NET Hindi Questions From Previous Papers — practice the complete quiz, review flashcards, or try a random question.

1700+ previously asked UGC NET Hindi - यूजीसी नेट हिन्दी questions.


स्थापना [A] : तुलसी के मत में-<br />'निर्गुण रूप सुलभ अति‚सगुन जान नहि कोई। सुगम अगम नाना चरित‚ सुनि मुनि-मन भ्रम होई॥' तर्क [R] : क्योंकि सगुण साकार को उपासना और अनुभव के दायरे में लाना सहज है‚ जबकि निर्गुणनिराकार की उपासना और अनुभूति नितान्त कठिन।