स्थापना [Assertion] [A] : मनुष्य को कर्म में प्रवृत्त करने वाली मूल प्रवृत्ति भावात्मिका है। केवल तर्कबुद्धि था विवेचना के बल से हम किसी कार्य में प्रवृत्त नहीं होते तर्क [Reason] [R]: क्योंकि जहाँ जटिल बुद्धि-व्यापार के अनंतर किसी कर्म का अनुष्ठान देखा जाता है वहाँ भी तह में कोई भाव या वासना छिपी रहती है।

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स्थापना [Assertion] [A] : मनुष्य को कर्म में प्रवृत्त करने वाली मूल प्रवृत्ति भावात्मिका है। केवल तर्कबुद्धि था विवेचना के बल से हम किसी कार्य में प्रवृत्त नहीं होते तर्क [Reason] [R]: क्योंकि जहाँ जटिल बुद्धि-व्यापार के अनंतर किसी कर्म का अनुष्ठान देखा जाता है वहाँ भी तह में कोई भाव या वासना छिपी रहती है।