स्थापना [Assertion [A] : प्रसाद के अनुसार काव्य मन और आत्मा की संकल्पात्मक अनुभूति है‚ जिसका सम्बन्ध विश्लेषण‚ विकल्प या विज्ञान से नहीं है। तर्क [Reason [R] : क्योंकि काव्य आत्मा की मनन-शक्ति की वह असाधारण अवस्था है जो श्रेय सत्य को उसके मूल चारुत्व में सहसा ग्रहण कर युगों की समष्टि अनुभूतियों में अंतर्निहित शाश्वत चेतनता का काव्यमय सृजन करती है। इसीलिए छायावादी काव्य की मूल चेतना रहस्यवादी है।

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स्थापना [Assertion [A] : प्रसाद के अनुसार काव्य मन और आत्मा की संकल्पात्मक अनुभूति है‚ जिसका सम्बन्ध विश्लेषण‚ विकल्प या विज्ञान से नहीं है। तर्क [Reason [R] : क्योंकि काव्य आत्मा की मनन-शक्ति की वह असाधारण अवस्था है जो श्रेय सत्य को उसके मूल चारुत्व में सहसा ग्रहण कर युगों की समष्टि अनुभूतियों में अंतर्निहित शाश्वत चेतनता का काव्यमय सृजन करती है। इसीलिए छायावादी काव्य की मूल चेतना रहस्यवादी है।