''सत्त्वोद्रेकाद खण्ड स्वप्रकाशनन्द चिन्मय:। वेद्यान्तरस्पर्शशून्यो ब्रह्मास्वादसहोदर:। लोकोत्तर चमत्कार प्राण: कैश्चित्प्रमातृभि:। स्वाकारवद भिन्नत्वेनायमास्वाद्यते रसः।'' रस के विषय में उपर्युक्त स्थापना किस आचार्य की है?

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''सत्त्वोद्रेकाद खण्ड स्वप्रकाशनन्द चिन्मय:। वेद्यान्तरस्पर्शशून्यो ब्रह्मास्वादसहोदर:। लोकोत्तर चमत्कार प्राण: कैश्चित्प्रमातृभि:। स्वाकारवद भिन्नत्वेनायमास्वाद्यते रसः।'' रस के विषय में उपर्युक्त स्थापना किस आचार्य की है?






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