निम्नलिखित गद्यांश को सावधनीपूर्वक पढ़ें और पाँच प्रश्नों ( प्रश्न संख्या 89 से 94) का उत्तर दें। महर्षि पतंजलि ने कैवल्य-प्राप्ति के लिए योग के आठ अंग बताए हैं। योग के ये अंग हैं: यम (सार्वभौमिक नैतिक निर्देश)‚ नियम (अनुशासन द्वारा आत्मशुद्धि)‚ आसन‚ प्राणायाम (प्राण का लयात्मक नियंत्रण) प्रत्याहार (इंद्रियों का निग्रह और समग्र वशीकरण)‚ धारणा‚ ध्यान और समाधि (परम चेतना की स्थिति)। इनमें से प्रथम पाँच अंगों को बहिरंग योग तथा शेष तीन अंगों को अंतरंग योग माना गया है। 'यम' समाज और व्यक्ति के लिए नैतिक नियम हैं निमें अहिंसा‚ सत्य‚ अस्तेय‚ ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह हैं। नियम वे आचार-संहिता हैं‚ जो व्यक्तिगत अनुशासन के लिए लागू होते हैं। पाँच नियम हैं- शौच‚ संतोष‚ तप‚ स्वाध्याय और ईश्वर-प्रणिधान। अष्टांग योग का तीसरा अंग आसन है। आसन के अभ्यास से स्थिरता और सुख प्राप्त होते हैं तथा व्यक्ति ताप-शीत‚ प्यास-भूख‚ राग-द्वेष आदि के द्वंद्वों से आसानी से प्रभावित नहीं होता है। प्राणायाम का अभिप्राय श्वास अथवा जीवनदायिनी शक्ति का विस्तार अथवा विनियमन है। यह चार प्रकार का होता है‚ यथा बाह्यवृत्ति‚ आभ्यांतर वृत्ति‚ स्तंभवृत्ति और बाह्याभ्यांतर-विषयाक्षेपी। असन में सिद्धि के बाद ही प्राणायाम का अभ्यास किया जाना चाहिए। प्राणायाम ज्ञान के प्रकाश के ऊपर पड़े आवरण को हटाता है और मन को धारणा के लिए समर्थ बनाता है। प्रत्याहार इन्द्रियों‚ मन और चेतना को बाह्य विषयों से उनके सम्पर्क का निग्रह करने‚ और उन्हें अंदर आत्मा की ओर खींचने का अभ्यास है। प्रत्याहार की परिणति ज्ञानेन्द्रियों पर सम्पूर्ण नियंत्रण के रूप में होती है। धारणा का अभिप्राय शरीर के अंदर या बाहर के किसी चयनित बिन्दु या क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित करना है। ध्यान किसी एक ही बिन्दु या क्षेत्र पर चित्त को सतत यप से केन्द्रित करना है। समाधि परम चेतना की स्थिति है जहाँ आत्मबोध खो जाता है। अष्टांग योग कैवल्य प्राप्त करने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है। 89. प्राणायाम का निम्नलिखित में से कौन सा एक प्रकार नीं है?

🎲 Try a Random Question  |  Total Questions in Quiz: 347  |  🧠 Study this quiz with Flashcards
This question is part of a full practice quiz:
UGC NET Yoga Questions (in Hindi) From Previous Papers — practice the complete quiz, review flashcards, or try a random question.

325+ previously asked (Yoga योग  - संस्कृत: योगः ) questions.


निम्नलिखित गद्यांश को सावधनीपूर्वक पढ़ें और पाँच प्रश्नों ( प्रश्न संख्या 89 से 94) का उत्तर दें। महर्षि पतंजलि ने कैवल्य-प्राप्ति के लिए योग के आठ अंग बताए हैं। योग के ये अंग हैं: यम (सार्वभौमिक नैतिक निर्देश)‚ नियम (अनुशासन द्वारा आत्मशुद्धि)‚ आसन‚ प्राणायाम (प्राण का लयात्मक नियंत्रण) प्रत्याहार (इंद्रियों का निग्रह और समग्र वशीकरण)‚ धारणा‚ ध्यान और समाधि (परम चेतना की स्थिति)। इनमें से प्रथम पाँच अंगों को बहिरंग योग तथा शेष तीन अंगों को अंतरंग योग माना गया है। 'यम' समाज और व्यक्ति के लिए नैतिक नियम हैं निमें अहिंसा‚ सत्य‚ अस्तेय‚ ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह हैं। नियम वे आचार-संहिता हैं‚ जो व्यक्तिगत अनुशासन के लिए लागू होते हैं। पाँच नियम हैं- शौच‚ संतोष‚ तप‚ स्वाध्याय और ईश्वर-प्रणिधान। अष्टांग योग का तीसरा अंग आसन है। आसन के अभ्यास से स्थिरता और सुख प्राप्त होते हैं तथा व्यक्ति ताप-शीत‚ प्यास-भूख‚ राग-द्वेष आदि के द्वंद्वों से आसानी से प्रभावित नहीं होता है। प्राणायाम का अभिप्राय श्वास अथवा जीवनदायिनी शक्ति का विस्तार अथवा विनियमन है। यह चार प्रकार का होता है‚ यथा बाह्यवृत्ति‚ आभ्यांतर वृत्ति‚ स्तंभवृत्ति और बाह्याभ्यांतर-विषयाक्षेपी। असन में सिद्धि के बाद ही प्राणायाम का अभ्यास किया जाना चाहिए। प्राणायाम ज्ञान के प्रकाश के ऊपर पड़े आवरण को हटाता है और मन को धारणा के लिए समर्थ बनाता है। प्रत्याहार इन्द्रियों‚ मन और चेतना को बाह्य विषयों से उनके सम्पर्क का निग्रह करने‚ और उन्हें अंदर आत्मा की ओर खींचने का अभ्यास है। प्रत्याहार की परिणति ज्ञानेन्द्रियों पर सम्पूर्ण नियंत्रण के रूप में होती है। धारणा का अभिप्राय शरीर के अंदर या बाहर के किसी चयनित बिन्दु या क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित करना है। ध्यान किसी एक ही बिन्दु या क्षेत्र पर चित्त को सतत यप से केन्द्रित करना है। समाधि परम चेतना की स्थिति है जहाँ आत्मबोध खो जाता है। अष्टांग योग कैवल्य प्राप्त करने का सर्वश्रेष्ठ मार्ग है।<br /> 89. प्राणायाम का निम्नलिखित में से कौन सा एक प्रकार नीं है?