निर्देश- निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़िए और उसके आधार पर दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिएसमीक्षा त्मक (Critical) सिद्धांतवादियों की समाज के वैकल्पिक 'मॉडल' (प्रारूप) प्रस्तुत करने की असमर्थता के प्रति यह अधीरता जो वर्तमान प्रारूप (मॉडल)के विश्लेषण की वैकल्पिक विधि से भिन्न है‚ इसमें आंशिक रूप से समीक्षावादी (Critical) दार्शनिकों तथा 1970 के दशक के उत्तरार्द्ध के राजनैतिक सिद्धांतकारों के विरुद्ध आलोचना की गई है जो अक्सर कटु है। लेकिन इसका दूसरा कारण अप्रामाणिकता एवं पाखण्ड की उत्तरोत्तर बढ़ती भावना भी है जो समीक्षात्मक उपागम (Critical approach) से आवृत्त लगती है। उदाहरणार्थ रूसो वाल्ताचर के दुहरे मापदण्ड से खिन्न था जिसके कारण उसे रूस के राजा का दास बनना पड़ा और फिर भी वह निरंकुशतावादी शासकों पर तीखे आघात करता रहा। तथाकथित नव दार्शनिक जो 1970 के दशक में प्रकट हुए विशेष रूप से फ्रांस में‚ उत्तरोत्तर यह अनुभव करते रहे कि नवमार्क्सवादी सिद्धांतो के अधीन विरलीकृत अतिपरिष्कृत और पश्चिमी समाज की जटिल समीक्षा ने पूर्वी यूरोप के एकतंत्रवादी कम्युनिस्ट सरकारों के अस्वीकार्य व्यवहार को ढँकने के लिए धूमपट (Smokescreen) का काम किया है। नवदार्शनिकों का काम एक बार इनकी पोल खोलना है‚ लेकिन सामान्य ज्ञान के नाम पर इसी तर्ज पर लिखे गए शीर्षक से बारवेरी 'द ह्यूमन फेस' नाम से रचना की है। 'क्रिटीक ऑफ क्रिटिक्स' के अधिकांश भाग का एक भावनात्मक आधार है और समीक्षात्मक विश्लेषण अपने आप में‚ जिसकी शुरुआत मार्क्स से होती है। इसका भावनात्मक आधार था और अभी है। उदाहरणार्थ पूँजीवादी अस्वीकार्य था इसका कारण यह था कि इसने नवमार्क्सवादियों के अनुसार मानवजाति पर कई कष्ट थोपे थे और अभी भी थोप रहा है। मार्क्सवाद विरोधी आलोचक भी भावनात्मक दृष्टिकोण से आरंभ करते हैं कि मार्क्सवाद के आवरण में मानवजाति के एक भाग को एक सर्वसत्तावादी साँचे में ढाल दिया गया है और क्रमश: मानवता के बड़े भाग को इसी में ढाला जा रहा है। अत: मार्क्सवाद के आलोचक उसी तर्क पर लिखते हैं और पुराने राजनैतिक सिद्धांतकारों का अनुकरण करते हैं। आज का विश्व कई अर्थों में हॉब्स की बताई दुनिया जैसा है जिसका इस अंग्रेज लेखक में सत्रहवीं शताब्दी में वर्णन किया था। तानाशाह के अत्याचारों को कलंकित किया जाना चाहिए और उसके विकल्प विकसित किए जाने चाहिए तथा मानवजाति को प्रदान किए जाने चाहिए वर्ना क्रूर (तानाशाह) का आधिपत्य निश्चित है। राजनैतिक सिद्धांत का जन्म उस समय की खराब स्थितियों के प्रति विरक्ति के कारण तथा यह जानने की इच्छा से हुआ कि‚ हो क्या रहा है। इस मानवीय दुर्दशा से बाहर निकलने की रूपरेखा प्लेटो‚ हॉब्स‚ लॉक और रूसो बना चुके थे। राजनीतिक सिद्धांत को इस प्रकाय को नियमित पूरा करना चाहिए‚ क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो मनुष्य फिर बर्बर अवस्था में चला जाएगा।Q46. लेखक का सम्बन्ध मूलत: ……..की आलोचना से है।

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निर्देश- निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़िए और उसके आधार पर दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिएसमीक्षा त्मक (Critical) सिद्धांतवादियों की समाज के वैकल्पिक 'मॉडल' (प्रारूप) प्रस्तुत करने की असमर्थता के प्रति यह अधीरता जो वर्तमान प्रारूप (मॉडल)के विश्लेषण की वैकल्पिक विधि से भिन्न है‚ इसमें आंशिक रूप से समीक्षावादी (Critical) दार्शनिकों तथा 1970 के दशक के उत्तरार्द्ध के राजनैतिक सिद्धांतकारों के विरुद्ध आलोचना की गई है जो अक्सर कटु है। लेकिन इसका दूसरा कारण अप्रामाणिकता एवं पाखण्ड की उत्तरोत्तर बढ़ती भावना भी है जो समीक्षात्मक उपागम (Critical approach) से आवृत्त लगती है। उदाहरणार्थ रूसो वाल्ताचर के दुहरे मापदण्ड से खिन्न था जिसके कारण उसे रूस के राजा का दास बनना पड़ा और फिर भी वह निरंकुशतावादी शासकों पर तीखे आघात करता रहा। तथाकथित नव दार्शनिक जो 1970 के दशक में प्रकट हुए विशेष रूप से फ्रांस में‚ उत्तरोत्तर यह अनुभव करते रहे कि नवमार्क्सवादी सिद्धांतो के अधीन विरलीकृत अतिपरिष्कृत और पश्चिमी समाज की जटिल समीक्षा ने पूर्वी यूरोप के एकतंत्रवादी कम्युनिस्ट सरकारों के अस्वीकार्य व्यवहार को ढँकने के लिए धूमपट (Smokescreen) का काम किया है। नवदार्शनिकों का काम एक बार इनकी पोल खोलना है‚ लेकिन सामान्य ज्ञान के नाम पर इसी तर्ज पर लिखे गए शीर्षक से बारवेरी 'द ह्यूमन फेस' नाम से रचना की है। 'क्रिटीक ऑफ क्रिटिक्स' के अधिकांश भाग का एक भावनात्मक आधार है और समीक्षात्मक विश्लेषण अपने आप में‚ जिसकी शुरुआत मार्क्स से होती है। इसका भावनात्मक आधार था और अभी है। उदाहरणार्थ पूँजीवादी अस्वीकार्य था इसका कारण यह था कि इसने नवमार्क्सवादियों के अनुसार मानवजाति पर कई कष्ट थोपे थे और अभी भी थोप रहा है। मार्क्सवाद विरोधी आलोचक भी भावनात्मक दृष्टिकोण से आरंभ करते हैं कि मार्क्सवाद के आवरण में मानवजाति के एक भाग को एक सर्वसत्तावादी साँचे में ढाल दिया गया है और क्रमश: मानवता के बड़े भाग को इसी में ढाला जा रहा है। अत: मार्क्सवाद के आलोचक उसी तर्क पर लिखते हैं और पुराने राजनैतिक सिद्धांतकारों का अनुकरण करते हैं। आज का विश्व कई अर्थों में हॉब्स की बताई दुनिया जैसा है जिसका इस अंग्रेज लेखक में सत्रहवीं शताब्दी में वर्णन किया था। तानाशाह के अत्याचारों को कलंकित किया जाना चाहिए और उसके विकल्प विकसित किए जाने चाहिए तथा मानवजाति को प्रदान किए जाने चाहिए वर्ना क्रूर (तानाशाह) का आधिपत्य निश्चित है। राजनैतिक सिद्धांत का जन्म उस समय की खराब स्थितियों के प्रति विरक्ति के कारण तथा यह जानने की इच्छा से हुआ कि‚ हो क्या रहा है। इस मानवीय दुर्दशा से बाहर निकलने की रूपरेखा प्लेटो‚ हॉब्स‚ लॉक और रूसो बना चुके थे। राजनीतिक सिद्धांत को इस प्रकाय को नियमित पूरा करना चाहिए‚ क्योंकि अगर वह ऐसा नहीं करेगा तो मनुष्य फिर बर्बर अवस्था में चला जाएगा।<br />Q46. लेखक का सम्बन्ध मूलत: ……..की आलोचना से है।






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