(कॉम्प्रीहेंशन) प्रश्न संख्या 1 से 5 के लिए निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा प्रश्न संख्या 1 से 5 के उत्तर इस गद्यांश के आधार पर ही दीजिए। कुछ महापुरुष तटस्थ होकर चिंतन करते हैं और अन्वीक्षण‚ चिंतन‚ मनन‚ विश्लेषण‚ संश्लेषण आदि के आधार पर नई व्यवस्था की कल्पना करते हैं तथा नए मूल्यों‚ नये आदर्शों तथा नई आस्थाओं का सृजन करते हैं। नई व्यवस्था देने वाले ऐसे तटस्थ चिंतक धन्य होते हैं‚ क्योंकि केवल आलोचना करते रहना तो सरल है किन्तु उपाय बताना कठिन है। माक्र्स ने कुछ उपाय बताए और लेनिन ने उन्हें मूर्त रूप दिया। रूसो‚ लास्की आदि ने भी उपाय बताए‚ उन्हें साकार करना अन्य जन पर निर्भर रहा। किन्तु कुछ महापुरुष और भी आगे बढ़ गए। उन्होंने केवल उपाय नहीं बताया बल्कि स्वयं एकनिष्ठा से उस पर आचरण करने के लिए जुट गए। महात्मा गाँधी ने जो समझा वही कहा‚ और जो कहा वही किया। उनके विचार‚ कथनी और करन एक ही थे। उनमें अपनी बात कहने और आचरण करने का साहस था। उनका जीवन अपने सुझाए हुए उपायों एवं आदर्शों के आधार पर विहित प्रयोगों और अनुभवों की सजीव श्रृंखला है। महात्मा गाँधी काल के प्रवाह के साथ नहीं बहे। वे युग प्रवर्तक हो गए। गाँधी महान्‌ और अलौकिक पुरुष थे।1. उक्त गद्यांश का संबंध निम्नलिखित में से किससे है?

🎲 Try a Random Question  |  Total Questions in Quiz: 96  |  🧠 Study this quiz with Flashcards
This question is part of a full practice quiz:
Uttar Pradesh UPPSC Previous Papers - CSAT Paper 2 2015 — practice the complete quiz, review flashcards, or try a random question.


(कॉम्प्रीहेंशन) प्रश्न संख्या 1 से 5 के लिए निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा प्रश्न संख्या 1 से 5 के उत्तर इस गद्यांश के आधार पर ही दीजिए। कुछ महापुरुष तटस्थ होकर चिंतन करते हैं और अन्वीक्षण‚ चिंतन‚ मनन‚ विश्लेषण‚ संश्लेषण आदि के आधार पर नई व्यवस्था की कल्पना करते हैं तथा नए मूल्यों‚ नये आदर्शों तथा नई आस्थाओं का सृजन करते हैं। नई व्यवस्था देने वाले ऐसे तटस्थ चिंतक धन्य होते हैं‚ क्योंकि केवल आलोचना करते रहना तो सरल है किन्तु उपाय बताना कठिन है। माक्र्स ने कुछ उपाय बताए और लेनिन ने उन्हें मूर्त रूप दिया। रूसो‚ लास्की आदि ने भी उपाय बताए‚ उन्हें साकार करना अन्य जन पर निर्भर रहा। किन्तु कुछ महापुरुष और भी आगे बढ़ गए। उन्होंने केवल उपाय नहीं बताया बल्कि स्वयं एकनिष्ठा से उस पर आचरण करने के लिए जुट गए। महात्मा गाँधी ने जो समझा वही कहा‚ और जो कहा वही किया। उनके विचार‚ कथनी और करन एक ही थे। उनमें अपनी बात कहने और आचरण करने का साहस था। उनका जीवन अपने सुझाए हुए उपायों एवं आदर्शों के आधार पर विहित प्रयोगों और अनुभवों की सजीव श्रृंखला है। महात्मा गाँधी काल के प्रवाह के साथ नहीं बहे। वे युग प्रवर्तक हो गए। गाँधी महान्‌ और अलौकिक पुरुष थे।<br />1. उक्त गद्यांश का संबंध निम्नलिखित में से किससे है?






ADVERTISEMENT