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सदाचारी व्यक्ति अपने काम से बड़े बनते हैं। दुराचारी व्यक्ति दूसरों के काम में बाधाएँ उत्पन्न करके बड़प्पन बटोरना चाहते हैं। लेकिन एक न एक दिन उनकी कलई खुल जाती है। उनके अनुचित कार्य उनको कहीं का नहीं छोड़ते। इतना होने पर भी वे बेशर्म होकर अच्छे लोगों की बुराई करने में अपना समय बर्बाद करते रहते हैं। किसी की प्रशंसा सुनना उनके कानों को अच्छा नहीं लगता। इतने ही परिश्रम से यदि वे अच्छे कार्य करें, तो वे भी अच्छे आदमी बन सकते हैं, सम्मान पा सकते हैं। परन्तु वे अपनी आदत से मजबूर हैं, उनके मन की कुटिलता उन्हें अच्छे काम करने से रोकती है। सदाचारी व्यक्ति अच्छे काम करके चैन की नींद सोता है और सुखी रहता है। दुराचारी व्यक्ति बुरे काम करके अपना सुख-चैन नष्ट करता है, अपने मन को बीमार करता है। मन की बीमारी कुछ दिनों में शरीर की भी बीमारी बन जाती है।
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