ईरान से आया रफीउद्दीन शिरा़जी लिखता है कि‚ ''मैं (आगरा में) भीड़ के बीच तम्बू के बने घेरे में खड़ा था‚ तभी अचानक आवाज गुँजी 'खुदा राजा की रक्षा करे।' मैं समझा कि राजा आ गया है। मैंने देखा कि बीस वर्ष का एक युवा अपने प्रिय लोगों की ओर झुका था। मैने अनुमान लगाया कि वह राजा होगा। परन्तु लोगों ने कोई शिष्टाचार या अभिवादन नहीं किया । मैं बड़ा आश्चर्यचकित था और मैने पूछा कि क्या राजा के प्रति आदर प्रकट करने की कोई परंपरा नहीं है। उन्होंने उत्तर दिया कि दरबारियों के लिए शिष्टाचार बहुत ज्यादा हैं‚ परन्तु राजा स्वयं सबसे ज्यादा अनौपचारिक है । वह साथियों और अजनबियों के बीच कोई भेद नहीं करता है।'' निम्नलिखित में से किस शासक के बारे में शिरा़जी ने यह लिखा है?

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ईरान से आया रफीउद्दीन शिरा़जी लिखता है कि‚ ''मैं (आगरा में) भीड़ के बीच तम्बू के बने घेरे में खड़ा था‚ तभी अचानक आवाज गुँजी 'खुदा राजा की रक्षा करे।' मैं समझा कि राजा आ गया है। मैंने देखा कि बीस वर्ष का एक युवा अपने प्रिय लोगों की ओर झुका था। मैने अनुमान लगाया कि वह राजा होगा। परन्तु लोगों ने कोई शिष्टाचार या अभिवादन नहीं किया । मैं बड़ा आश्चर्यचकित था और मैने पूछा कि क्या राजा के प्रति आदर प्रकट करने की कोई परंपरा नहीं है। उन्होंने उत्तर दिया कि दरबारियों के लिए शिष्टाचार बहुत ज्यादा हैं‚ परन्तु राजा स्वयं सबसे ज्यादा अनौपचारिक है । वह साथियों और अजनबियों के बीच कोई भेद नहीं करता है।'' निम्नलिखित में से किस शासक के बारे में शिरा़जी ने यह लिखा है?






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