निम्नलिखित अवतरण को सावधानीपूर्वक पढ़िए। और उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के लिए सही उत्तर का चयन कीजिए (प्र.सं. 63 से 67) :ईस्वी सन्‌ की चतुर्थ शताब्दी के मध्य में मानव प्रजाति के इतिहास में एक ज्वालामुखी के विस्फोट जैसी घटना घटित हुई। कैस्पियन सागर के उत्तरी तट के क्षेत्रों में स्थित अपने देश से एक भयानक अग्नि की धारा के रूप में हूण निकले और समस्त यूरोप और एशिया में फैल गए। बेघर और अनियन्त्रित वे सोते-जागते अपने घोड़ों पर सवार रहते थे। उनकी भीषण हुंकार जहां कहीं सुनाई पढ़ती लोग भयाक्रान्त हो जाते थे। विश्व के सारे सभ्य समाज से उन्होंने विनाशकारी युद्ध किया और जहां कहीं भी उससे बन पड़ा उन्होंने लोगों को नरसंहार किया‚ विनाश किया‚ भस्म किया और सारा कुछ दानवी क्रूरता के साथ विध्वंस कर दिया। यूरोप में तो हूण एट्टिला ने शक्तिशाली रोमन साम्राज्य को ही पतन के गर्त में डाल दिया। 455 ई. के लगभग हूण भारत में प्रविष्ट होने लगे। अपने महती प्रयास से सम्राट स्कन्दगुप्त ने उन्हें खदेड़ दिया। बारह वर्ष बाद ही उसकी मृत्यु हो गई। साम्राज्य की सीमा-चौकियां‚ जो पहले से ही निर्बल थीं‚ आगे उनका प्रतिरोध नहीं कर सकीं। बर्बर हूण फारस को लांघते हुए और उत्तर-पश्चिम के कुषाण शासकों को विनष्ट करते हुए तेजी से भारत में घुसने लगे। स्कन्दगुप्त की मृत्यु के पश्चात्‌ कदाचित्‌ उत्तराधिकार का युद्ध छिड़ गया‚ जिससे उक्त संकट की स्थिति में साम्राज्य कमजोर हो गया। ई. 500 से 570 के बीच अगले पांच सम्राट‚ जिनमें नरसिंहगुप्त‚ बालादित्य सम्मिलित था‚ पतनोन्मुख किन्तु नाममात्र के साम्राज्य के कतिपय भागों में अपनी डावांडोल सत्ता बनाए रखने में सफल रहे। साम्राज्य के सुसम्बद्ध केन्द्रीय भाग की सीमाओं के बाहर बहुत से भू-भाग स्वतंत्र हो गए। साम्राज्य के ही प्रान्त सौराष्ट्र में मैत्रक सेनानायक ने स्कन्दगुप्त की मृत्यु के बाद वस्तुत: अपनी साम्राज्य-निष्ठा का विच्छेद कर दिया। 512 ई. तक हूणों ने तोरमाण के नेतृत्व में उत्तर भारत को मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित एरण तक‚ रौंद डाला। तोरमाण का पुत्र मिहिरकुल‚ जो एक भयानक आतंक का पर्याय था‚ उसने पंजाब से ग्वालियर तक आग और लूट की आंधी फैला दी और 525 ई. तक एक विशाल भू-भाग का स्वामी बन गया। कुछ ही समय में उत्तर भारत मिहिरकुल के बर्बर आघात से उबरने और मिहिरकुल का प्रतिरोध करने में सक्षम हुआ।63. चौथी शताब्दी ई. के मध्य का साम्राज्यिक शासक कौन था?

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निम्नलिखित अवतरण को सावधानीपूर्वक पढ़िए। और उसके नीचे दिए गए प्रश्नों के लिए सही उत्तर का चयन कीजिए (प्र.सं. 63 से 67) :<br />ईस्वी सन्‌ की चतुर्थ शताब्दी के मध्य में मानव प्रजाति के इतिहास में एक ज्वालामुखी के विस्फोट जैसी घटना घटित हुई। कैस्पियन सागर के उत्तरी तट के क्षेत्रों में स्थित अपने देश से एक भयानक अग्नि की धारा के रूप में हूण निकले और समस्त यूरोप और एशिया में फैल गए। बेघर और अनियन्त्रित वे सोते-जागते अपने घोड़ों पर सवार रहते थे। उनकी भीषण हुंकार जहां कहीं सुनाई पढ़ती लोग भयाक्रान्त हो जाते थे। विश्व के सारे सभ्य समाज से उन्होंने विनाशकारी युद्ध किया और जहां कहीं भी उससे बन पड़ा उन्होंने लोगों को नरसंहार किया‚ विनाश किया‚ भस्म किया और सारा कुछ दानवी क्रूरता के साथ विध्वंस कर दिया। यूरोप में तो हूण एट्टिला ने शक्तिशाली रोमन साम्राज्य को ही पतन के गर्त में डाल दिया। 455 ई. के लगभग हूण भारत में प्रविष्ट होने लगे। अपने महती प्रयास से सम्राट स्कन्दगुप्त ने उन्हें खदेड़ दिया। बारह वर्ष बाद ही उसकी मृत्यु हो गई। साम्राज्य की सीमा-चौकियां‚ जो पहले से ही निर्बल थीं‚ आगे उनका प्रतिरोध नहीं कर सकीं। बर्बर हूण फारस को लांघते हुए और उत्तर-पश्चिम के कुषाण शासकों को विनष्ट करते हुए तेजी से भारत में घुसने लगे। स्कन्दगुप्त की मृत्यु के पश्चात्‌ कदाचित्‌ उत्तराधिकार का युद्ध छिड़ गया‚ जिससे उक्त संकट की स्थिति में साम्राज्य कमजोर हो गया। ई. 500 से 570 के बीच अगले पांच सम्राट‚ जिनमें नरसिंहगुप्त‚ बालादित्य सम्मिलित था‚ पतनोन्मुख किन्तु नाममात्र के साम्राज्य के कतिपय भागों में अपनी डावांडोल सत्ता बनाए रखने में सफल रहे। साम्राज्य के सुसम्बद्ध केन्द्रीय भाग की सीमाओं के बाहर बहुत से भू-भाग स्वतंत्र हो गए। साम्राज्य के ही प्रान्त सौराष्ट्र में मैत्रक सेनानायक ने स्कन्दगुप्त की मृत्यु के बाद वस्तुत: अपनी साम्राज्य-निष्ठा का विच्छेद कर दिया। 512 ई. तक हूणों ने तोरमाण के नेतृत्व में उत्तर भारत को मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित एरण तक‚ रौंद डाला। तोरमाण का पुत्र मिहिरकुल‚ जो एक भयानक आतंक का पर्याय था‚ उसने पंजाब से ग्वालियर तक आग और लूट की आंधी फैला दी और 525 ई. तक एक विशाल भू-भाग का स्वामी बन गया। कुछ ही समय में उत्तर भारत मिहिरकुल के बर्बर आघात से उबरने और मिहिरकुल का प्रतिरोध करने में सक्षम हुआ।<br />63. चौथी शताब्दी ई. के मध्य का साम्राज्यिक शासक कौन था?