निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और इसके बाद दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :''राष्ट्रवादी आंदोलन प्रारम्भ से ही नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए उत्साही था। इसलिए‚ राष्ट्रवादियों ने प्रेस‚ बोलने और सभा करने की स्वतंत्रता तथा अन्य नागरिक स्वतंत्रताओं पर औपनिवेशिक शासन के प्रहार के विरुद्ध संघर्ष किया। जवाहरलाल नेहरू संभवत:नागरिक स्वतंत्रताओं के सर्वाधिक दृढ़ पैरोकार थे। उन्होंने इन स्वतंत्रताओ को उतना ही अधिक महत्त्व दिया‚ जितना कि आर्थिक समानता और समाजवाद को । उन्होंनें 1931 में कराची कांग्रेस में मौलिक अधिकारों के बारे में पारित प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था। इस प्रस्ताव में भाषण और प्रेस के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई थी। धर्मनिरपेक्षता को आरम्भ से ही राष्ट्रवादी विचारधारा का एक मूल घटक बनाया गया और हिन्दूमस्लिम एकता पर भारी बल दिया गया। इसके अतिरिक्त‚ यह स्पष्ट रूप से समझा गया कि क्षेत्रीय‚ धार्मिक‚ जातिगत‚ नृजातीय और भाषायी भिन्नताओं को अंगीकार करते हुए एक राष्ट्र के रूप में भारतीय जनता को एकता के सूत्र में बांधने का उद्देश्य प्राप्त होगा। 1921 में भाषायी आधार पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रान्तीय और क्षेत्रीय समितियों को गठित कर भिन्न-भिन्न भाषायी समूह की सांस्कृतिक आकांक्षाओं को अंगीकार किया गया‚ न कि ब्रिटेन-निर्मित बहु-भाषायी प्रान्तों के आधार पर। अपने प्रारम्भिक चरण से भारतीय राष्ट्रवादियों ने लगभग सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि देश के पूरे आर्थिक रूपांतरण का लक्ष्य आधुनिक औद्योगिक एवं कृषि-संबंधी विकास हो‚ जिससे विदेशी पूँजी से मुक्त होने के आधार पर भारत को आर्थिक दृष्टि से आत्म-निर्भर बनाया जाए‚ स्वदेशी पूँजीगत सामानों का निर्माण हो और स्वतंत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास की आधारशिला रखी जाए।96. अंग्रेजों ने भारतीयों को नागरिक स्वतंत्रताएँ क्यों नहीं दीं ?

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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़िए और इसके बाद दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :<br />''राष्ट्रवादी आंदोलन प्रारम्भ से ही नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के लिए उत्साही था। इसलिए‚ राष्ट्रवादियों ने प्रेस‚ बोलने और सभा करने की स्वतंत्रता तथा अन्य नागरिक स्वतंत्रताओं पर औपनिवेशिक शासन के प्रहार के विरुद्ध संघर्ष किया। जवाहरलाल नेहरू संभवत:<br />नागरिक स्वतंत्रताओं के सर्वाधिक दृढ़ पैरोकार थे। उन्होंने इन स्वतंत्रताओ को उतना ही अधिक महत्त्व दिया‚ जितना कि आर्थिक समानता और समाजवाद को । उन्होंनें 1931 में कराची कांग्रेस में मौलिक अधिकारों के बारे में पारित प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था। इस प्रस्ताव में भाषण और प्रेस के माध्यम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई थी। धर्मनिरपेक्षता को आरम्भ से ही राष्ट्रवादी विचारधारा का एक मूल घटक बनाया गया और हिन्दूमस्लिम एकता पर भारी बल दिया गया। इसके अतिरिक्त‚ यह स्पष्ट रूप से समझा गया कि क्षेत्रीय‚ धार्मिक‚ जातिगत‚ नृजातीय और भाषायी भिन्नताओं को अंगीकार करते हुए एक राष्ट्र के रूप में भारतीय जनता को एकता के सूत्र में बांधने का उद्देश्य प्राप्त होगा। 1921 में भाषायी आधार पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रान्तीय और क्षेत्रीय समितियों को गठित कर भिन्न-भिन्न भाषायी समूह की सांस्कृतिक आकांक्षाओं को अंगीकार किया गया‚ न कि ब्रिटेन-निर्मित बहु-भाषायी प्रान्तों के आधार पर। अपने प्रारम्भिक चरण से भारतीय राष्ट्रवादियों ने लगभग सर्वसम्मति से स्वीकार किया कि देश के पूरे आर्थिक रूपांतरण का लक्ष्य आधुनिक औद्योगिक एवं कृषि-संबंधी विकास हो‚ जिससे विदेशी पूँजी से मुक्त होने के आधार पर भारत को आर्थिक दृष्टि से आत्म-निर्भर बनाया जाए‚ स्वदेशी पूँजीगत सामानों का निर्माण हो और स्वतंत्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास की आधारशिला रखी जाए।<br />96. अंग्रेजों ने भारतीयों को नागरिक स्वतंत्रताएँ क्यों नहीं दीं ?






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