निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा इसके बाद में दिये गये प्रश्नों के सही उत्तर चुनिए :हेगेल के दर्शन ने ईसाई विद्वानों तथा धर्म निरपेक्ष दार्शनिकों के बीच की खाई को पाट दिया। उदार ईसाइयों को संतुष्ट करने के लिए उसने ईश्वरतत्व का पर्याप्त रूप में समावेश किया तथा साथ ही तर्क पर भी बल दिया जिससे बुद्धिवादी तुष्ट हुए। इस प्रक्रिया में उसने नये प्रतिमानों की स्थापना की जिनसे विद्‌वतसमुदाय गहन रूप में प्रभावित हुआ। उसके मैक्रो ऐतिहासिक उपागम ने ऐतिहासिक अध्ययनों के दायरे को विस्तारित किया। इन अध्ययनों जो अब तक राजनीतिक इतिहास तथा जीवनचरितात्मक कृतियों तक सीमित थे को विस्तारित करने के फायदों को इस उपागम ने सोदाहरण स्पष्ट किया। कार्ल मार्क्स सहित‚ नई पीढ़ी के इतिहासकारों ने सामाजिक इतिहास में नवीन संभावनाओं को उत्सुकतापूर्वक स्वीकार किया। पृथक इतिहासों को सर्व-परिवृत्त विश्व-इतिहास के साथ जोड़ने के प्रयास किये गये। हेगल द्वारा किए गये इतिहास के चार महायुगों में विभाजन (ओरिएण्टल‚ग्रीक‚ रोमन तथा जर्मन) से अनेक इतिहासकारों ने यह विश्वासपूर्वक स्वीकार किया कि विभिन्न संस्कृतियां एवं युग मूलत:असमान थे। तथा उनका मूल्यांकन उनके अपने संदर्भ तथा संबंधित युग की विशिष्ट आवश्यकताओं को स्वीकार करके करना चाहिए। हेगेल के इस बात पर बल कि बहुधा वास्तविक प्रयोजनों तथा प्रदर्शित प्रयोजनों में भिन्नता होती है‚ ने दोत सामग्रियों के अधिक आलोचनात्मक मूल्यांकन की ओर प्रवृत्त किया। संगतता के लिए कार्यों‚ प्रयोजनों तथा अप्रत्यक्ष प्रभावों का अधिक से अधिक सूक्ष्म परीक्षण किया जाने लगा तथा आकस्मिक संबंध अधिक से अधिक महत्वपूर्ण बनते गये। द्वन्द्वात्मक मॉडल का तात्कालिक प्रभाव कम था‚ परन्तु बाद की पीढ़ियों में अनेक ऐतिहासिक मीमांसाओं में है आधारिक सिद्धान्त बन गया है।47. हेगेल ने किस प्रकार ईसाई विद्वानों तथा धर्म निरपेक्ष दार्शनिकों के मध्य खाई को पाटा?

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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा इसके बाद में दिये गये प्रश्नों के सही उत्तर चुनिए :<br />हेगेल के दर्शन ने ईसाई विद्वानों तथा धर्म निरपेक्ष दार्शनिकों के बीच की खाई को पाट दिया। उदार ईसाइयों को संतुष्ट करने के लिए उसने ईश्वरतत्व का पर्याप्त रूप में समावेश किया तथा साथ ही तर्क पर भी बल दिया जिससे बुद्धिवादी तुष्ट हुए। इस प्रक्रिया में उसने नये प्रतिमानों की स्थापना की जिनसे विद्‌वतसमुदाय गहन रूप में प्रभावित हुआ। उसके मैक्रो ऐतिहासिक उपागम ने ऐतिहासिक अध्ययनों के दायरे को विस्तारित किया। इन अध्ययनों जो अब तक राजनीतिक इतिहास तथा जीवनचरितात्मक कृतियों तक सीमित थे को विस्तारित करने के फायदों को इस उपागम ने सोदाहरण स्पष्ट किया। कार्ल मार्क्स सहित‚ नई पीढ़ी के इतिहासकारों ने सामाजिक इतिहास में नवीन संभावनाओं को उत्सुकतापूर्वक स्वीकार किया। पृथक इतिहासों को सर्व-परिवृत्त विश्व-इतिहास के साथ जोड़ने के प्रयास किये गये। हेगल द्वारा किए गये इतिहास के चार महायुगों में विभाजन (ओरिएण्टल‚ग्रीक‚ रोमन तथा जर्मन) से अनेक इतिहासकारों ने यह विश्वासपूर्वक स्वीकार किया कि विभिन्न संस्कृतियां एवं युग मूलत:<br />असमान थे। तथा उनका मूल्यांकन उनके अपने संदर्भ तथा संबंधित युग की विशिष्ट आवश्यकताओं को स्वीकार करके करना चाहिए। हेगेल के इस बात पर बल कि बहुधा वास्तविक प्रयोजनों तथा प्रदर्शित प्रयोजनों में भिन्नता होती है‚ ने दोत सामग्रियों के अधिक आलोचनात्मक मूल्यांकन की ओर प्रवृत्त किया। संगतता के लिए कार्यों‚ प्रयोजनों तथा अप्रत्यक्ष प्रभावों का अधिक से अधिक सूक्ष्म परीक्षण किया जाने लगा तथा आकस्मिक संबंध अधिक से अधिक महत्वपूर्ण बनते गये। द्वन्द्वात्मक मॉडल का तात्कालिक प्रभाव कम था‚ परन्तु बाद की पीढ़ियों में अनेक ऐतिहासिक मीमांसाओं में है आधारिक सिद्धान्त बन गया है।<br />47. हेगेल ने किस प्रकार ईसाई विद्वानों तथा धर्म निरपेक्ष दार्शनिकों के मध्य खाई को पाटा?