निम्न गद्य को पढ़ें और प्रश्न 97 से 100 तक के उत्तर दें। हमारे पास इस बात का प्रमाण देखते हुए कि पहले छह महीनों के लिए शुरुआती एवं अनन्य स्तन्य आहार से बाल उत्तरजीविता को बढ़ाने में काफी योगदान मिल सकता है और अच्छे पूरक आहार से रुद्‌विकास में कमी लाने में योगदान मिल सकता है‚ यह अवश्यकरणीय हो जाता है कि शुरुआती पोषण पर कार्रवाई अवश्य की जानी चाहिए। एक प्रायोगिक परियोजना से सुपूर्दगी तंत्र स्थापित करने में उपयोगी मॉडल मिलता है। इसने सभी गर्भवती एवं स्तन्यदावण करने वाली महिलाओं तक पहुँचने‚ उनके दो साल से कम उम्र के बच्चों की पोषणगत एवं स्वास्थ्यगत स्थिति में योगदान करने के उद्देश्य से कुशल परामर्श सेवा‚ बेहतर पर्यवेक्षण एवं निगरानी के माध्यम से इष्टतम शिशु एवं अल्पवय बाल आहार ( आई.वाई.सी.एफ. ) परिपाटियों के संवर्धन के लिए समुदाय आधारित एवं सुविधा-केन्द्र आधारित दोनों कार्यनीतियों का उपयोग किया। आहार परिपाटियों का प्रलेखन करने के लिए बेसलाइन इंटरवेन्शन-पूर्व मूल्यांकन किया गया। कार्यान्वयन में जमीनी स्तर पर क्षमता का निर्माण करना और ब्लॉक एवं जिला स्तर पर समर्थक तंत्र का निर्माण करना शामिल थे। इसे 48 स्थानीय स्नातक महिला 'परामर्शदाताओं ( मेंटर ) '− प्रत्येक छह ब्लॉक में आठ-के परिनियोजन के माध्यम से हासिल किया गया। इन 'मेंटरों' को आहार परिपाटियों पर परामर्श देने के ज्ञान एवं कौशल के साथ प्रशिक्षकों के रूप में प्रशिक्षित किया गया था। उन्हें आगे आंगनवाड़ी वर्करों‚ आशा‚ दाई या उसी गांव से लिंक मदर में से 3 – 4 'ग्रामस्तरीय परामर्शदाताओं' की एक टीम को प्रशिक्षित करने के लिए भी कहा गया था जो 'मातृ सहयोग समूह' का निर्माण करते थे। उन्होंने स्तन्य आहार और पूरक आहार पर माताओं एवं परिवारों को शिक्षा देने के प्रयोजनार्थ अपने प्रशिक्षण के साथप्राप्त 'परामर्श गाइडों' का उपयोग किया। उन्होंने पर्चे और पोस्टर आदि जैसे आई.ई.सी. के तरीकों एवं सामग्री का भी इस्तेमाल किया। ग्रामस्तरीय परामर्शदाताओं ने आहारगत कठिनाइयों के संबंध में माताओं की सहायता की‚ और यदि वे किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर पाए तो उन्हें ब्लॉक स्तरीय परामर्श केन्द्र भेजा। इंटरवेन्शन-उपरांत मूल्यांकन में चार आहार परिपाटियों‚ नामत:‚ दुग्धसम वाहिनी-पूर्व आहार का 44 . 4 प्रतिशत से कम होकर 28 . 3 प्रतिशत होना‚ जन्म के एक घंटे के भीतर स्तन्य आहार की शुरुआत करने में 39 . 2 प्रतिशत से 57 . 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी होना‚ प्रथम छह महीनों के लिए अनन्य आहार का 6 . 85 प्रतिशत से 24 . 9 प्रतिशत हो जाना और 6 – 9 महीनों के बीच जारी स्तन्य आहार के साथ सम्पूरक आहार दिए जाने का 4 . 6 प्रतिशत से 35 . 8 प्रतिशत हो जाना‚ में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। 97. प्रायोगिक परियोजना में किस शोध अभिकल्प (रिसर्च ड़िजाइन) का उपयोग किया गया था?

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निम्न गद्य को पढ़ें और प्रश्न 97 से 100 तक के उत्तर दें। हमारे पास इस बात का प्रमाण देखते हुए कि पहले छह महीनों के लिए शुरुआती एवं अनन्य स्तन्य आहार से बाल उत्तरजीविता को बढ़ाने में काफी योगदान मिल सकता है और अच्छे पूरक आहार से रुद्‌विकास में कमी लाने में योगदान मिल सकता है‚ यह अवश्यकरणीय हो जाता है कि शुरुआती पोषण पर कार्रवाई अवश्य की जानी चाहिए। एक प्रायोगिक परियोजना से सुपूर्दगी तंत्र स्थापित करने में उपयोगी मॉडल मिलता है। इसने सभी गर्भवती एवं स्तन्यदावण करने वाली महिलाओं तक पहुँचने‚ उनके दो साल से कम उम्र के बच्चों की पोषणगत एवं स्वास्थ्यगत स्थिति में योगदान करने के उद्देश्य से कुशल परामर्श सेवा‚ बेहतर पर्यवेक्षण एवं निगरानी के माध्यम से इष्टतम शिशु एवं अल्पवय बाल आहार ( आई.वाई.सी.एफ. ) परिपाटियों के संवर्धन के लिए समुदाय आधारित एवं सुविधा-केन्द्र आधारित दोनों कार्यनीतियों का उपयोग किया। आहार परिपाटियों का प्रलेखन करने के लिए बेसलाइन इंटरवेन्शन-पूर्व मूल्यांकन किया गया। कार्यान्वयन में जमीनी स्तर पर क्षमता का निर्माण करना और ब्लॉक एवं जिला स्तर पर समर्थक तंत्र का निर्माण करना शामिल थे। इसे 48 स्थानीय स्नातक महिला 'परामर्शदाताओं ( मेंटर ) '− प्रत्येक छह ब्लॉक में आठ-के परिनियोजन के माध्यम से हासिल किया गया। इन 'मेंटरों' को आहार परिपाटियों पर परामर्श देने के ज्ञान एवं कौशल के साथ प्रशिक्षकों के रूप में प्रशिक्षित किया गया था। उन्हें आगे आंगनवाड़ी वर्करों‚ आशा‚ दाई या उसी गांव से लिंक मदर में से 3 – 4 'ग्रामस्तरीय परामर्शदाताओं' की एक टीम को प्रशिक्षित करने के लिए भी कहा गया था जो 'मातृ सहयोग समूह' का निर्माण करते थे। उन्होंने स्तन्य आहार और पूरक आहार पर माताओं एवं परिवारों को शिक्षा देने के प्रयोजनार्थ अपने प्रशिक्षण के साथप्राप्त 'परामर्श गाइडों' का उपयोग किया। उन्होंने पर्चे और पोस्टर आदि जैसे आई.ई.सी. के तरीकों एवं सामग्री का भी इस्तेमाल किया। ग्रामस्तरीय परामर्शदाताओं ने आहारगत कठिनाइयों के संबंध में माताओं की सहायता की‚ और यदि वे किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर पाए तो उन्हें ब्लॉक स्तरीय परामर्श केन्द्र भेजा। इंटरवेन्शन-उपरांत मूल्यांकन में चार आहार परिपाटियों‚ नामत:‚ दुग्धसम वाहिनी-पूर्व आहार का 44 . 4 प्रतिशत से कम होकर 28 . 3 प्रतिशत होना‚ जन्म के एक घंटे के भीतर स्तन्य आहार की शुरुआत करने में 39 . 2 प्रतिशत से 57 . 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी होना‚ प्रथम छह महीनों के लिए अनन्य आहार का 6 . 85 प्रतिशत से 24 . 9 प्रतिशत हो जाना और 6 – 9 महीनों के बीच जारी स्तन्य आहार के साथ सम्पूरक आहार दिए जाने का 4 . 6 प्रतिशत से 35 . 8 प्रतिशत हो जाना‚ में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।<br /> 97. प्रायोगिक परियोजना में किस शोध अभिकल्प (रिसर्च ड़िजाइन) का उपयोग किया गया था?