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अनेकार्थी शब्द किसे कहते है? हर भाषा में कुछ ऐसी शब्द होते है जिनके एक से अधिक अर्थ निकलते है | ये अलग – अलग अवसरों में, वाक्यों के साथ मिलकर अलग – अलग अर्थ देते है | ये शब्द अनेकार्थी शब्द अथवा ‘नानार्थक’ शब्द कहते हैं।
1. अक्ष-आँख, सर्प, ज्ञान, मण्डल, रथ, चौसर का पासा, धुरी, हरिया,आत्मबलि।
2. अरुण–लाल, सूर्य, सूर्य का सारथी,ग्रह का नाम ।
3. अम्बर–वस्त्र, आकाश, कपास, एक इत्र, अभ्रक, एक नजर, मेघ।
4. अर्क—सूर्य, मदार का पौधा, इन्द्र, स्फटिक, काढ़ा, तांबा, विष्णु।
5. अपवाद–कलंक, वह प्रसंग जो सामान्य नियम के विरुद्ध हो।
6. अंक-गोद, गिनती के अंक, नाटक के अंक, चिह्न, संख्या।
7. अक्षर-ब्रह्म, विष्णु, अकारादि वर्ण, शिव, धर्म, मोक्ष, गगन, सत्य, जल,नित्य।
8. अमृत-अमिय, स्वर्ग, जल, पारा, दूध, अन्न।
9. अपेक्षा-इच्छा, आवश्यकता, आशा, बनिस्बत।
10. अनन्त-आकाश, समुद्र, ब्रह्म, अन्तहीन, सर्पों का राजा, अनन्त चतुर्दशी का भुजबन्धन।
11. अनल-आग,, जीव, कृत्तिका नक्षत्र, तीन की संख्या ।
12. अनर्थ-अनिष्ट, अर्थहीन, निरर्थक, धन का अभाव।
13. अनार्य-असभ्य, अधम, जो आर्य न हो।
14. अन्तर-भेद, अन्दर, हृदय, मध्य भाग।
15. अन्ध – अन्धा, उल्लू, चमगादड़, अन्धकार ।
16. आत्मा – स्वरूप, ब्रह्म, सूर्य, अग्नि, परमात्मा।
17. आँख–नेत्र, दृष्टि, निगरानी, संतान।
18. आश्रम-तपोभूमि, आश्रय स्थान, जीवन का चार भागों में विभाजन।
19. आतुर-उत्सुक, उतावला, रोगी, कमजोर, दुःखी।
20. आम-मामूली, सर्वसाधारण, आम का फल।
21. इन्दु-चन्द्रमा, कपूर, गणित में एक की संख्या।
22. इड़ा -पृथ्वी, गाय, वाणी, स्तुति, अन्न, स्वर्ण, दुर्गा, नाड़ी विशेष।
23. उगना-उदय होना, निकल आना, पैदा होना, प्रकट होना।
24. उग्र-भयानक, क्रूर, तीव्र, कष्टदायक, प्रचण्ड, महादेव, गरम, सूर्य।
25. उल्लास-प्रकाश, झलक, एक अलंकार, ग्रंथ का भाग, पर्व, सर्ग।
26. उपचार-व्यवहार, प्रयोग, चिकित्सा, सेवा, धर्मानुष्ठान, घूस, खुशामद।
27. उमा-पार्वती, दुर्गा, हल्दी, अलसी, कीर्ति, कान्ति।
28. उषा-प्रभात, अरुणोदय की लालिमा, बाणासुर की कन्या।
29. उर्मि-लहर, पीड़ा, दुःख, शिकन, कपड़े की सिलवट।
30. कनक-सोना, धतूरा, गेहूं, आटा, नागकेसर, खजूर।
31. कर–किरण, हाथ, टैक्स, सूंड, ओला, छल।
32. कर्ण – कान, कुन्ती का पुत्र; समकोण त्रिभुज में समकोण के सामने की भुजा।
33. काल-समय, मृत्यु, शत्रु, अवसर, यमराज, अकाल।
34. कमल—एक फूल, एक मांसपिण्ड, जल, तांबा।
35. कृष्ण – वेदव्यास, काला, कृष्ण भगवान, एक पक्ष, चन्द्रमा का धब्बा।
36. केतु-ध्वजा, एक ग्रह, पुच्छल तारा, ज्ञान, प्रकाश।
37. कटक–सेना, शिविर, समूह, कड़ा, श्रृंखला, चटाई।
38. कट्टर–कठोर, दृढ़प्रतिज्ञ, अपने मन का, जिद्दी।
39. कड़ा—कठोर, कठिन, कंकड़, कर्कश, तेज, एक आभूषण।
40. कर्ता—करने वाला, बनाने वाला, परिवार का मुखिया, पहला कारक।
41. कलम-लेखनी, कूँची, कनपटी के बाल, पेड़-पौधों की हरी लकड़ी।
42. कुंभ-प्रयाग तीर्थ का बारहवें वर्ष का मेला, हाथी के मस्तक के दोनों ओर का भाग, घड़ा।
43. कलि–कलह, दुःख, पाप, चार युगों में चौथा युग, सूरमा, संग्राम, काला।
44. कोरा-बिल्कुल नया, अप्रयुक्त, अलिखित कागज., गुणरहित व्यक्ति.।
45. क्रिया-कर्म, कार्यवाही, कर्म होने का द्योतक शब्द।
46. कच-बाल, पपड़ी, झुण्ड, बादल, बृहस्पति का पुत्र।
47. कट – हाथी का गंड स्थल, खस, शव, श्मशान, काला रंग।
48. कोश-अण्डा, डिब्बा, तलवार की म्यान, आवरण, थैली, संचित धन,शब्दकोश, समूह।
49. कल-मशीन, चैन, आने वाला कल/बीता कल, शान्ति, सुन्दर मधुर ध्वनि,आराम।
50. कौशिक-विश्वामित्र, इंदु, सवेरा, उल्लू, देवता।
51. खण्ड-भाग, देश, वर्षा, समीकरण की एक क्रिया, खांड, दिशा।
52. खल-दुष्ट, धतूरा, तलछट, चुगलखोर।
53. खर—गधा, तिनका, एक राक्षस, दुष्ट, प्रखर।
54. गण-समूह, श्रेणी, सेना का एक भाग, पिंगल शास्त्र में तीन वर्गों का समूह,शिव के सेवक, दूत, अनुचर।
55. ग्रह-तारे, नौ की संख्या लेना, अनुग्रह, कृपा, ग्रहण, राहु।
56. गुण-विशेषता, धर्म, प्रकृति के तीन भाव, निपुणता, कोई कला अथवा विद्या,प्रभाव, शील, सद्वृत्ति, कौशल।
57. गौ -गाय, किरण, वृष राशि, इंद्रिय, वाणी, सरस्वती, आँख, दृष्टि, बिजली,
58. गौतमी – हल्दी, गोदावरी नदी, गोरोचन।
59. ग्रहण-लेना, पकड़ना, सूर्य-चंद्र पर राहु-केतु का प्रभाव।
60. गंभीर-गहरा, घना, भारी, जटिल, चिंताजनक, शान्त।
61. गाँठ-फंदा, गठरी, गिरह, मनमुटाव, उलझन।
62. गाड़ना-जमीन में दबाना, धंसना, खड़ा करना झण्डा.।
63. गुलाबी – गुलाब के रंग का, हल्का जाड़ा., गुलाब का।
64. गायत्री-एक वैदिक छन्द, एक वैदिक मंत्र, दुर्गा।
65. गिरा-वाणी, सरस्वती, जिह्वा।
66. गोपाल-गाय पालने वाला, कृष्ण, ग्वाला, किसी बालक का नाम।
67. घन – बादल, घना, किसी संख्या को उसी संख्या से दो बार गुणा करने पर गुणनफल, भारी हथौड़ा।
68. घोर—बहुत घना, बहुत अधिक, बहुत बुरा, भवानक।
69. घुमाना—मोड़ना, चक्कर देना, लट्टू चलाना, प्रचारित करना, सैर करना।
70. घाट—किसी जलाशय या नदी का वह स्थान जहां लोग पानी भरते और नहाते हैं, पहाड़, पहाड़ी मार्ग।
71. घुटना–कष्ट सहना, सांस लेने में कठनाई, पैर का जोड़ भाग।
72. चन्द्र – चन्द्रमा, एक की संख्या, मोर की पूँछ की चंद्रिका, कपूर, जल, सोना, भूगोल का उपद्वीप, साधु, नासिक, वर्ण की ऊपर. बिंदी, हीरा।
73. चाल-रफ्तार, गति, चलने का ढंग, आहट, चालाकी, मोहरों का हिलना,रिवाज, धोखा।
74. चाप–परिधि का एक भाग, आलू. टिकिया, दबाव, धनुष।
75. चाक-कुम्हार का चाक, चक्की, गोल वस्तु, पानी का मैवर, बवण्डर, समूह, एक प्रकार का युद्ध व्यूह, मण्डल।
76. जुड़ना-जुटना, सम्मिलित होना, मिलना, जोड़ा जाना, जोता जाना।
77. चरण-पैर, बड़ों का संग, किसी छन्द का एक पद, किसी चीज का एक चौथाई भाग, अनुष्ठान, गोत्र, आचार, सूर्य आदि की किरण।
78. जड़-मूल, मूर्ख, हठी, अचेतन, चेष्टाहीन, शीतल, गूंगा, बहरा, नींव।
79. जलज – कमल, मोती, सिवार, शंख, मछली, चन्द्रमा, जल से उत्पन्न।
80. ज्येष्ठ-बड़ा, श्रेष्ठ, पति का बड़ा भाई, जेठ का महीना।
81. जाल–फरेब, बुनावट, जाला, जमघट, बड़ी जाली।
82. जन-लोग, प्रजा, गवार, अनुचर, समूह, भवन, मजदूरी, सात लोकों में से एक।
83. जलना – शरीर तपना, ईर्ष्या करना, भस्म हो जाना, आग लगना।
84. जलाना – आग देना, प्रज्वलित करना, चुभती बातें कहना, ईर्ष्या उत्पन्न करना।
85. जोड़ना—योग करना, एकत्र करना, बढ़ाना, मिलाना।
86. झंझरी – झरोखा, जाली, छाननी, पीने की माही।
87. झाड़-पौधों का झुरमुट, एक आतिशबाजी, गुच्छा, डाँट-फटकार।
88. टीका-फलदान, तिलक, मस्तक का गहना, श्रेष्ठ, व्याख्या।
89. टेक – सहारा, गीत का छोटा पद, आग्रह, आदत, सहारा देने की लकड़ी।
90. टाँकना-सुई से कुछ जोड़ना, रकम लिख रखना, चाकू या छूरी. तेज करना।
91. ठाकुर-देवता, ईश्वर, मालिक, सरदार, जमींदार, क्षत्रिय, नाई।
92. डूबना – अस्त होना, पानी के नीचे जाना, नष्ट होना, समाप्त होना।
93. ढलना—ह्रास की ओर बढ़ना, ढलान की ओर जाना, साँचे में बनाया जाना, समय बीतने को होना।
94. तारा– नक्षत्र, आँख की पुतली, देवी-विशेष, बालि की पत्नी, बृहस्पति की पत्नी।
95. तीक्ष्ण – धारदार, तेज, प्रचंड, उग्र, चरपरा।
96. तीर – नदी का तट, बाण, समीप।
97. तम-अंधकार, राहु, सुअर, पाप, क्रोध, अज्ञान, मोह।
98. तल-नीचे का भाग, पेंदा, जल के नीचे की भूमि, पैर का तलवा, हथेली,
99. सतह,- सप्त पातालों में से एक।
100. तत्व-मूल, यथार्थ, सार, पंचभूत, ब्रह्मा।
101. तात-पिता, पूज्य, धारा, मर्म, बड़ा, गुरु, भाई, मित्र।
102. ताप-ज्वर, आंच, कष्ट, मानसिक कष्ट, तीन प्रकार के ताप आध्यात्मिक, आधिवैदिक एवं आधिभौतिक. उष्णता।
103. तक्षक-विश्वकर्मा, बढ़ई, सूत्रधार, सर्प विशेष।
104. तिलक– टीका, राज्याभिषेक, एक गहना, श्रेष्ठ व्यक्ति, घोड़े की एक विशेष जाति, ग्रंथ की व्याख्या।
105. तुला—तुलना, तराजू, तौल, एक राशि।
106. दोष-कमी, विकार, अपराध, बुराई, ऐब।
106. दण्ड – डण्डा, सजा, समय का विभेद, यम, अस्त्र, बांस की विशेष लकड़ी जिसे दण्डी स्वामी ग्रहण करते हैं।
107. द्विज–अण्डज, प्राणी, पक्षी, ब्राह्मण, चन्द्रमा, दाँत।
108. दल-समूह, पत्ता, फूल की पंखुड़ी, मंडली, सेना।
109. दक्ष-चतुर, ब्रह्मा के पुत्र का नाम, प्रजापति।
110. द्रोण-द्रोणाचार्य, कौआ, दोना, एक पर्वत विशेष, बिच्छू, लकड़ी का रथ।
111. द्वार-दरवाजा, अंश, साधन, शरीर के छिद्र वाले अंग।
112. ध्रुव-स्थिर, निश्चित, पर्वत, राजा उत्तानपाद का पुत्र ।
113. धनञ्जय—अग्नि, चित्रक, वृक्ष, अर्जुन का नाम, अर्जुन वृक्ष, विष्णु
114. धात्री – माता, आँवला, पृथ्वी, उपमाता, धाय।
115. धन-सम्पत्ति, गणित में जोड़ का चिह्न, मूल, पूँजी।
116. नक्शा – मानचित्र, रूपरेखा, आकृति, लच्छन, नखरा।
117. नायक-सेनापति, छोटा सेनाधिकारी, मुखिया, नाटक का मुख्य पात्र।
118. नाल—नली, अर्धचन्द्राकार लोहा, डंडी, डंठल।
119. नग–पर्वत, रत्न-विशेष नगीना., सूर्य, सर्प, वृक्ष।
120. निशाचर-चोर, उल्लू, प्रेत, राक्षस।
121. निष्कर्ष– सारांश, अन्तिम, परिणाम, निश्चय।
122. नाक – नासिका, शोभा की वस्तु, प्रतिष्ठा, स्वर्ग, आकाश।
123. नीलकंठ – शिव, मोर, एक पक्षी-विशेष।
124. नेपथ्य – वेशभूषा, सजावट, रंगमंच का पिछला भाग।
125. न्यास-धरोहर, भेंट, उपस्थित करना, त्याग, ट्रस्ट।
126. पय–दूध, पानी, अन्न।
127. पति—स्वामी, दूल्हा, ईश्वर, इज्जत, प्रतिष्ठा।
128. पद-पैर, ओहदा, वाक्यांश, छंद का चरण, पात्र, निशान, किरण, प्रदेश।
129. पक्ष-पंख, दल, पन्द्रह दिन की अवधि पखवारा., पाव।
130. पतंग-सूर्य, पक्षी, गुड्डी, पतंगा, नाव।
131. पानी-जल, इज्जत, चमक, वर्षा, स्वाभिमान।
132. पृष्ठ-पीठ, पन्ना, पीछे का भाग, ऊपरी सतह।
133. पार्थिव-पृथ्वी का, राजसी, मिट्टी का शिवलिंग।
134. पोत—जहाज, बच्चा, वस्त्र, गुड़िया।
135. पंचानन–सिंह, शिव, प्रकांड विद्वान।
136. पक्का-ईंटों का बना, पुष्ट, निश्चित, स्थिर।
137. पट-कपड़ा, परदा, किवाड़।
138. पत्र—पत्ता, चिट्ठी, पंख, समाचार-पत्र, धातु का पत्तर।
139. पता—ठिकाना, भेद, मालूम होना, सूचना।
140. पयोधर—बादल, तालाब, स्तन, पर्वत।
141. पर्चा– प्रश्न-पत्र, कागज, अखबार।
142. परिकर-समूह, कमरबंद, परिवार, नौकर-चाकर।
143. पल्ला-आँचल, तराजू का पलड़ा, दिशा, किवाड़।
144. पाटी-पंक्ति, रीति, तख्ती, चारपाई की पट्टी।
145. पुराना-प्राचीन, ढेर सारे दिनों का, जीर्ण-शीर्ण, अनुभवी व्यक्ति.।
146. पुष्कर-तालाब, कमल, पानी, मद।
147. पुष्ट-पक्का, परिपूर्ण, सिद्ध, दृढ़, पाला-पोसा।
148. पेशी-मुकदमे की सुनवाई, पेश होने की अवस्था, शरीर का पुट्ठा, तलवार की म्यान।
149. प्रत्यय-विश्वास, शब्द के पीछे जोड़ा जाने वाला अक्षर या अक्षर समूह।
150. प्रपंच-झंझट, बखेड़ा, मिथ्या, जगत, विस्तार।
151. प्रभाव – सामर्थ्य, असर, महिमा, दबाव।
152. पाक-पकाने की क्रिया, रसोई, वचन, पवित्र, निर्दोष ।
153. पर-पंख, ऊपर, दूसरा, किन्तु, पराया।
154. बहार-बसंत ऋतु, आनंद, रोचक, एक राग विशेष।
155. बंधन—बाँधने की चीज, कैद, बाँध, पुल।
156. बौराया-पागल, जिसमें बौर लग गया हो।
157. बचाना-रक्षा करना, खर्च से बचाना, सामने न आने देना।
बल-शक्ति, सेना, सहारा, चक्कर, मरोड़।
158. बिन्दु-बूंद, कण, शून्य, अनुस्वार, चिह्न ।
159. बंशी—बांसुरी, मछली फंसाने का कांटा।
160. भगवान—ईश्वर, ऐश्वर्यशाली, महापुरुष, पूज्य, ज्ञान और वैराग्य से सम्पन्न।
161. भाव-विचार, अभिप्राय, श्रद्धा, दर, अस्तित्व, मुखाकृति।
162. भूत-प्रेत, शरीर के पंचभूत, बीता काल।
163. भेद-रहस्य, अंतर, फूट, छेदन।
164. भोग-कर्मों का फल, कब्जा, विलास, देवता का खाद्य पदार्थ, सुखानुभव।
165. मान-इज्जत, नाप-तौल, अभिमान, रूठना, घमंड।
166. महीधर – पर्वत, शेषनाग, एक वर्णिक छन्द।
167. माया-प्रम, दौलत, इंद्रजाल, भगवान की लीला।
168. मूल-जड़, कंद, आरंभ, पंजी, नींव, मुख्य।
169. मुद्रा-सिक्का, मोहर, अंगूठी, छापा, चिह्न, आकृति।
170. मद-हर्ष, कस्तूरी, नशा, गर्व, मतवाला।
171. योग-मेल, लगाव, ध्यान, कुल, जोड़, शुभकाल, मन की साधना।
172. रक्त-लाल, खून, केसर, लाल चंदन।
173. रस-निचोड़, स्वाद, आनन्द, धातु का भस्म।
174. रसाल—आम, ईख, रसीला, मीठा।
175. रंग-वर्ण, शोभा, मनोविनोद, रोब, नाच-गाना, ढंग, युद्ध क्षेत्र।
176. राशि-किसी का उत्तराधिकारी, मेष, वृष आदि राशियां, धन।
177. लगाना—जोड़ना, चिपकाना, मारना, खर्च कर देना, नियुक्त करना, आरम्भ कराना, सटाना, चुभना।
178. लंगर – लोहे का कांटा, जंजीर, लँगोट, कच्ची सिलाई, भारी, रुका रहना,नटखट, गरीबों में बांटा जाने वाला भोजन।
179. लय – एक पदार्थ का दूसरे में मिलना, ध्यान में डूबना, अनुराग, प्रलय।
180. लाल-बेटा, छोटा, प्रिय बालक, श्रीकृष्ण, लाड़-प्यार, चाह, रक्तवर्ण, बहुत
181. वर्ण-अक्षर, रंग, जाति, शब्द, सोना, रूप, चातुर्वर्ण्य ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य,शूद्र.
182. विधि-कानून, भाग्य, ब्रह्मा, अग्नि, समय, विष्णु, युक्ति, व्यवस्था, तरीका,विधाता।
183. विधान–अनुष्ठान, व्यवस्था, प्रणाली, रचना, ढंग, आज्ञा करना।
184. विग्रह-लड़ाई, शरीर, देवता की मूर्ति, विश्लेषण। का
185. वार-आक्रमण, दिन, बाण, शिव, बारी, अवसर, द्वार।
186. वन–जंगल, जल, बाग, काष्ठ, फूलों का गुच्छा।
187. विषय – भोग-विलास, प्रसंग, भौतिक पदार्थ, स्थान, विवेचनार्थ बात।
188. वर-दूल्हा, श्रेष्ठ, वरण करने योग्य, वरदान।
189. विचार-राय, सलाह, ध्यान, मान्यता।
190. विभूति-ऐश्वर्य, बहुतायत, दिव्य, शक्ति, राख, महिमामय, पुरुष।
191. विवेचन–तर्क-वितर्क, सत्-असत् विचार, निरूपण, परीक्षण।
192. वृत्त-गोल घेरा, वृत्तांत, चरित्र, वर्णिक छन्द।
193. वेला – अवकाश, समय, समुद्र की लहर।
194. व्यवहार—काम, बरताव, महाजनी, दीवानी, मामला, मुकदमा।
195. सैंधव-नमक, सिंधु देश का घोड़ा।
196. संकोच-सिकुड़ना, लज्जा, हिचकिचाहट।
197. संज्ञा–संकेत, ज्ञान, नाम, चेतना।
198. संधि-जोड़, अक्षरों का मेल, युगों का मिलन, पारम्परिक, निश्चय, सेंध।
199. संस्कार–परिशोध, सफाई, धार्मिक कृत्य, आचार-व्यवहार, मन पर पड़ने वाले प्रभाव।
200. सधना—आशय पूरा होना, अभ्यस्त होना, ठीक जगह पर लगना।
201. सम्बन्ध – जोड़, मेल-जोल, रिश्ता, ताल्लुक, व्याकरण में छठां कारक।
202. सरल-ईमानदार, सीधा, आसान, खरा।
203. सही – हस्ताक्षर, सच, ठीक, प्रामाणिकता।
204. साधन – उपाय, उपकरण, सामान, पालन, कारण।
205. साधना-सिद्ध करना, मनोयोगपूर्वक आराधना सम्पन्न करना, पक्का करना, अपने वश में करना।
206. साफ-निर्मल, निर्दोष, समतल, शुद्ध, स्पष्ट, निश्छल, हिसाब. चुकता।
207. सारंग – कोयल, चातक, मोर, हंस, बाज, सिंह, घोड़ा, हाथी, एक मृग, सूर्य,चन्द्रमा, सोना, भौंरा, धनुष, बादल।
208. सोम–एक देवता, चन्द्रमा, सोमवार, कुबेर, यम, अमृत, वायु, जल, स्वर्ग।
209. सेहत-सुख, स्वास्थ्य, रोग से छुटकारा।
210. स्नेह-प्रेम, तेल, चिकना, पदार्थ, कोमलता।
211. हरि-विष्णु, इंद्र, सर्प, सूर्य, घोड़ा, चाँद, किरण, हंस, आग, हाथी,कामदेव।
212. हंस-प्राण, सूर्य, आत्मा, शिव, ब्रह्मा, विष्णु, एक प्रकार का पक्षी।
213.हेम–बर्फ, स्वर्ण, इज्जत, पीला रंग।
214. हर–प्रत्येक, शिव, हरण करने वाला, भिन्न में अंश के नीचे की संख्या।
215. हार—पराजय, थकावट, हानि, विरह, माला, सुन्दर, भाजक, नाश करने वाला।
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