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Study Guide: ऊर्जा संसाधन (Chhattisgarh GK in Hindi - Energy Resources)
Source: https://www.fatskills.com/chhattisgarh-public-service-commission-cgpsc/chapter/-chhattisgarh-gk-in-hindi-energy-resources

ऊर्जा संसाधन (Chhattisgarh GK in Hindi - Energy Resources)

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छत्तीसगढ़ राज्य में विद्युत उत्पादन एवं पारदर्शिता
क्षेत्र चालिका
शक्ति
उत्पादन
(MU)
पी.एल.एफ. प्रतिशत
अप्रैल 17 से
अक्टूबर
17 तक
अप्रैल 18 से
अक्टूबर 18
तक
अंतर
प्रतिअप्रैल
17 से
अक्टूबर 17
अप्रैल 18 से
अक्टूबर 18
राज्यीय तापीय 11940.238 13167.905 10.28 70.88 78.17
जल विद्युत 193.814 209.256 7.97
निजी तापीय 18328 27946 52 37.4 44.4
केंद्रीय तापीय 34148 35374 3.6 85.1 88.2
कुल 64016 76681
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल :- वित्तीय वर्ष 2017-18 के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों व लक्ष्य के विरूद्व अर्जित उपलब्धियों, राज्य शासन एवं केन्द्र शासन की विभिन्न योजनाओं की प्रगति के साथ आगामी वित्त वर्ष 2018-19 हेतु निर्धारित विभिन्न लक्ष्यों, कार्यक्रमों की बिन्दुवार जानकारी निम्नानुसार है- उत्पादन संकाय 1. विद्युत उत्पादन की स्थापित क्षमता एवं विद्युत उत्पादन 2. जिला जांजगीर-चांपा के समीपस्थ ग्राम मड़वा
वर्षवार उत्पादन क्षमता, उत्पादन तथा खपत
वर्ष 2011-12 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16 2016-17 2017-18
उत्पादन
क्षमता
(मेगावाट)
1924.70 1924.70 2424.40 2424.70 3424.70 3424.70 3424.70
उत्पादन
(मिलियन
यूनिट)
12982.78 12465.99 12863.54 15931.29 15603.92 18097.43 21084.173
खपत
(मिलियन
यूनिट)
13173.0 14112.19 14789.89 17101.44 18600.63 19162.00 20362.49
वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान 21084.173 मिलियन यूनिट (तापीय 20834.401 जलीय 242. 519 एवं अन्य सह-उत्पादन 7.254 मिलियन यूनिट) विद्युत का उत्पादन किया गया जबकि वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान 18097.428 मिलियन यूनिट (तापीय 17906.323 जलीय 184529 एवं अन्य सह-उत्पादन 6.576 मिलियन यूनिट) विद्युत का उत्पादन किया गया था। विद्युत उत्पादन संयत्रों की विशिष्ट उपलब्धियाँ वर्ष 2017-18 : छत्तीसगढ़ राज्य गठन के समय राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता 1360 मेगावाट थी जो विगत 18 वर्षों में बढ़कर 3424.70 मेगावाट हो गयी। विगत 18 वर्षों में स्टेट सेक्टर की उत्पादन क्षमता में 152 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में कंपनी के विद्युत उत्पादन क्षमता (3424.70 मेगावाट) में 3280 मेगावाट तापीय एवं 138.70 मेगावाट जल विद्युत तथा 6 मेगावाट अन्य सह-उत्पादन शामिल है।
™™ वित्तीय वर्ष 2017-18 में कोयले की आपूर्ति के लिए विगत एक वर्ष में एसईसीएल से फ्यूल सप्लाई एग्रीमेंट के अंतर्गत निर्धारित आबंटित कोयले की मात्रा को लगभग 90.09% प्राप्त किया गया।
™™ चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 में 31 अक्टूबर 2018 तक छ.रा.वि.उत्पा.कं. मर्या के विभिन्न संयत्रों द्वारा कुल 13398.81 मिलियन यूनिट (तापीय 13168 मिलियन यूनिट PLF 78.
17% जलीय 229 21 मिलियन यूनिट एवं अन्य सह-उत्पादन 1.69 मिलियन यूनिट) विद्युत उत्पादन किया गया है। मुख्यमंत्री ऊर्जा प्रवाह योजना (एस.टी.एन.) : प्रदेश की विद्युत अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने हेतु इस योजना के अंतर्गत 194 नये उपकेन्द्रों का निर्माण किया जा रहा है। योजना में 194 नये 33/11 के.व्ही. विद्युत सब-स्टेशन की स्थापना के साथ-साथ इस हेतु आवश्यक विद्युत लाइनों के विस्तार एवं विद्यमान 33/11 के.व्ही. विद्युत उपकेन्द्रों की क्षमता वृद्धि के कार्य सम्मिलित है। योजना अंतर्गत स्वीकृत 33/11 के.व्ही. के 194 उपकेन्द्रों में से 84 उपकेन्द्रों का निर्माण कार्य कर उपकेन्द्रों को ऊर्जीकृत किया जा चुका है। तथा वर्ष के दौरान दिनांक 31.03.2018 तक रुपये 164.53 करोड़ व्यय किया गया है। दिनांक 30.09.2018 की स्थिति में 152 नये 33/11 केव्ही विद्युत सब-स्टेशन 57 नग अति पावर ट्रांसफार्मर एवं 50 नग 33/11 केव्ही उपकेन्द्र की क्षमता वृद्धि का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, शेष उपकेन्द्रों के कार्य का दिनांक 31.03.0219 तक पूर्ण किये जाने का लक्ष्य है। ग्राम विद्युतीकरण : जनगणना 2011 के अनुसार राज्य में कुल 19567 ग्रामों में से वित्त वर्ष 2017-18 के अंत तक 19535 (18250 परंपरागत तरीके से + 1285 अपरंपरागत तरीके से क्रेडा द्वारा) ग्राम विद्युतीकृत थे। राज्य में 2011 की जनगणना के आधार पर विद्युतीकरण कर स्तर 99.83 प्रतिशत रहा। वर्ष 2018-19 में दिनांक 30.09.2018 की स्थिति में 32 ग्राम अपरंपरागत तरीके (सौर उर्जा) से क्रेडा द्वारा विद्युतीकृत किया गया है। इस प्रकार दिनांक 30.09.2018 की स्थिति में प्रदेश में कुल 19567 आबाद ग्रामों में से विद्युतीकृत ग्रामों की संख्या 19567 अर्थात सभी 19467 (100 प्रतिशत) ग्रामों का विद्युतीकरण किया जा चुका है। कृषक जीवन ज्योति योजना : राज्य शासन द्वारा कृषकों को वित्तीय राहत प्रदान किये जाने के उद्देश्य से कृषक जीवन ज्योति योजना 02 अक्टबूर 2009 से लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत पात्र कृषकों को 3 अश्वशक्ति तक कृषि पम्प के बिजली बिल में 6000 यूनिट प्रति वर्ष एवं 3 से 5 अश्वशक्ति के कृषि पम्प के बिजली बिल में 7500 यूनिट प्रति वर्ष छूट दी जा रही है। उपरोक्त छूट अस्थाई कृषि पम्पों पर भी दी जाती है। नवंबर 2013 से कृषक जीवन ज्योति योजना के अंतर्गत पात्र कृषको को फ्लेट रेट दर पर बिजली प्राप्त करने का विकल्प भी दिया गया है। फ्लेट रेट का विकल्प चुनने वाले कृषकों को, उनके द्वारा की गई विद्युत खपत की कोई सीमा न रखते हुए, मात्र 100/प्रतिमाह प्रति अश्व शक्ति की दर बिजली बिल का भुगतान करना होगा। वर्ष 2017-108 में सिंचाई पंपों को नि:शुल्क विद्युत प्रदाय हेतु राज्य शासन के बजट में रुपये 2975.68 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। जिसके विरुद्व 906.35 करोड़ रु. शासन द्वारा वितरण कंपनी को आवंटित किया गया है। बी.पी.एल. (एकलबत्ती) कनेक्शन : गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों को बी.पी.एल. (एकलबत्ती) कनेक्शन की सुविधा प्रदान की गई है। इस श्रेणी के उपभोक्ताओं को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध करायी जा रही है, जिसके अन्तर्गत उपभोक्ता की प्रारंभिक 40 यूनिट की खपत पर कोई शुल्क नहीं है। इन बी.पी.एल. कनेक्शन धारियों के 40 यूनिट खपत के विद्युत देयक राशि की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा की जाती है। योजना का विस्तार करते हुए अगस्त 2018 से कमजोर आय वर्ग को रु. 100/-मासिक की दर से फ्लेट रेट पर बिजली उपलब्ध करायी जा रही है। रु. 100 से अधिक विद्युत देयक राशि की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा की जाती है। दिनांक 30..09.2018 की स्थिति में तक कुल बी.पी. एल. कनेक्शन की संख्या 18.60.786 (सौभाग्य योजना के तहत्‌ दी गई बी.पी.एल. कनेक्शन भी सम्मिलित) है, जिन्हे वितरण कंपनी द्वारा रियायती दर पर विद्युत प्रदान किया जाता है। इन बी.पी.एल. कनेक्शन धारियों के 40 यूनिट खपत के विद्युत देयक राशि का प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा किया जाता है। वर्ष 2018-19 हेतु राज्य शासन के बजट में रु. 363.14 करोड़ का प्रावधान किया गया है। जिसके विरूद्व 214.94 करोड़ रु. शासन द्वारा वितरण कंपनी को आबंटित किया गया है। मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना :- मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना के तहत प्रदेश के नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत विद्युत विहीन क्षेत्रों में विद्युत लाइनों का विस्तार, विद्यमान अव्यवस्थित विद्युत लाईनों की पहुंच मार्गों के अनुरूप व्यवस्थित करना एवं वितरण ट्रांसफार्मरों को सुरक्षा की दृष्टि से ओवर हेड अथवा अंडर ग्राउंड केबलों का इस्तेमाल किया जाना, अधिक लाईन लास वाले क्षेत्रों में ए.बी. केबल लगाया जाना एवं गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे सभी परिवार को नि:शुल्क बी.पी.एल. कनेक्शन उपलब्ध कराना आदि शामिल है। वर्ष 2018-19 हेतु राज्य शासन के बजट में योजनांतर्गत रु. 50 करोड़ का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री मजरा-टोला विद्युतीकरण योजना :- इस योजना के अंतर्गत ऐसे अविद्युतीकृत ग्राम एवं मजरे/टोले/बसाहटों का विद्युतीकरण किया जाना है जो राज्य में चल रही किसी अन्य योजना तथा राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण एकीकृत विद्युत विकास योजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में शामिल नहीं है, इसके अतिरिक्त इन ग्रामों/मजरे-टोले/ बसाहटों के बी.पी.एल. परिवारों को नि:शुल्क विद्युत कनेक्शन भी प्रदान भी किया जा रहा है। यदि बसाहटों में कुछ अतिरिक्त लाईन विस्तार की आवश्यकता पड़ती है तो यह कार्य भी इस योजना के अंतर्गत किया जा सकता है। वर्ष 2018-19 में योजनान्तर्गत रु. 30.21 करोड़ का प्रावधान किया गया है। एकीकृत विद्युत विकास योजना (I.P.D.S.) : भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के ओ. एम. क्रं. 26/1/2004-APDRP दिनांक 03.12.2014 के द्वारा एकीकृत विद्युत विकास योजना
(I.P.D.S.) प्रारम्भ की गई है। इस योजना के अन्तर्गत वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करना, सोलर पैनल की स्थापना, वितरण ट्रान्सफॉर्मर/11 के.व्ही. फीडर/उपभोक्ताओं की मीटरिंग, वितरण सेक्टर में आई.टी. उपयोग को उपयोगी बनाने के कार्य किये जाने हैं। एकीकृत विद्युत विकास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के कुल 182 शहरों में वितरण हानि को कम करने हेतु विद्युतीकरण के कार्य प्रस्तावित हैं। परियोजना की लागत 489.06 करोड़ हैं। योजना की कुल अवधि 30 माह है।
ताप विद्युत परियोजना
™™छत्तीसगढ़ का कोरबा भारत की ऊर्जा राजधानी है।
™™कोरबा में एन. टी. पी. सी. का सुपर थर्मल प्लांट 90 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर (पी. एल. एफ.) पर कार्य करता है और सी. एस. ई. बी. के संयंत्र भी प्रभावशाली है।
™™छत्तीसगढ़ तथा अन्य दो राज्यों में देश का 84 प्रतिशत कोयला है।
™™कोयले के बड़े भंडार के कारण सस्ता ऊर्जा विद्युत संयंत्रों को जल की आपू£त हसदो-बांगो परियोजना द्वारा किया जाता है।
कोरबा ताप विद्युत संयंत्र
™™कोरबा ताप विद्युत संयंत्र कोरबा जिले के जमीनीपाली गाँव में स्थित है। यह संयंत्र एन. टी. पी. सी. का कोयला आधारित ताप विद्युत घर है।
™™इस संयंत्र को कोयला कुसमुंडा गेवरा खानों से प्राप्त होता है।
™™इस संयंत्र का जल स्रोत हसदेव नदी है। यहाँ 4 पावर स्टेशनों में 14 इकाई कार्य कर रही है, जिनकी उत्पादन क्षमता 10 मेगावाट से 210 मेगावाट है। इस केन्द्र में 4 पावन स्टेशन हैं।
1. कोरबा I – यहाँ 30MW. के 3 इकाई है, प्रत्येक इकाई की 10 MW. क्षमता है तथा कुल मिलाकर 100MW. बिजली उत्पादन करते हैं।
2. कोरबा II – यहाँ 50MW. के 4 इकाईयाँ हैं जिनका कुल क्षमता 200MW.
है।
3. कोरबा IV – इसे पश्चिमी ताप विद्युत स्टेशन भी कहा जाता है।

कोरबा का 270MW. पॉवर प्लांट, छत्तीसगढ़

™™छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में, बलेंडेड कोयला पर आधारित 270MW. का ताप विद्युत संयंत्र हैं।
™™इस ऊर्जा संयंत्र में 135MW. के दो इकाईयाँ हैं तथा दोनों उत्पादन को मिलाकर 270MW.
उत्पादन क्षमता बनता है।
™™इस संयंत्र की पहली इकाई 13 दिसम्बर 2011 और दूसरा इकाई 21 जून 2012 में स्थापित हुई।
™™यह परियोजना छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के चाकाबुटा गाँव में स्थित है।
™™यहाँ तक कोरबा-चाम्पा राजमार्ग और कटघोरा-विलासपुर राजमार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है।
™™साथ ही कोरबा ऊर्जा परियोजना आसानी से सिपत पुलिस स्टेशन से जुड़ा है जहाँ से गुजरात राज्य ट्रांसमिशन यूटिलिटी नेटवर्क से ऊर्जा प्रदान कि जाती है।
हसदेव ताप ऊर्जा संयंत्र
™™यह सी. एस. ई. बी. पश्चिमी तट के नाम से भी जाना जाता है।
™™यह 1983 को स्थापित हुआ और इसकी क्षमता 840MW. है। जबकि सी. एस. ई. बी. की पूर्वी तट की विद्युत क्षमता 540MW. है।
™™कोरबा के पास गोपालपुर आई. बी. पी. विस्फोटक संयंत्र की स्थापित क्षमता 25000MT
प्रतिवर्ष है।
™™बांगो जल विद्युत परियोजना भी राज्य में महत्वपूर्ण है जिसकी ऊर्जा उत्पादन क्षमता
120MW. है।
राष्ट्रीय ताप ऊर्जा निगम लि.
™™छत्तीसगढ़ के कोरबा में स्थापित तीन 500MW. और तीन 200MW. के इकाईयों के साथ यह रोजाना 40000 मिलियन टन कोयला का उपयोग करता है।
™™यह एन. टी. पी. सी. का संयंत्र राज्य के प्रमुख इकाईयों को विद्युत प्रदान करने के साथ अन्य राज्यों को भी विद्युत प्रदान करता है जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, दादर और नगर हवेली, दमन और गोवा।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत बोर्ड (सी. एस. ई. बी.)
™™यह सरकारी संगठन है जिसका कार्य ऊर्जा उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण है।
™™इसकी स्थापना नवम्बर, 2000 में हुई। यह राज्य के लोगों को विद्युत प्रदान करने के साथ उत्तरी भारत को भी प्रदान करता है।
™™सी. एस. ई. बी. पूर्ण रूप से छत्तीसगढ़ राज्य की इकाई है।
™™यह कम्पनी मुख्य रूप से कोयला, गैस और तेल द्वारा विद्युत उत्पादन करता है।
™™इसके साथ ही यह जल ऊर्जा द्वारा भी विद्युत का उत्पादन करता है।
™™सी. एस. ई. बी. की कुल उत्पादन क्षमता 2207.35MW. है।
™™यह विद्युत के निर्माण के साथ राज्य के उपभोक्ताओं को विद्युत वितरण भी करती है। इस कम्पनी का मुख्यालय रायपुर में है।
सिपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन
™™ सिपत सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन या राजीव गाँधी सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन, बिलासपुर जिले के सिपत में स्थित है।
™™यह संयंत्र भी एन. टी. पी. सी. का कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र है।
™™इस संयंत्र के लिए कोयला साउथ इस्टर्न कोल फिल्ड का दिपका माइन से प्राप्त करता है।
™™इस परियोजना की स्थापित क्षमता 2980MW. है जो दो चरणों में बँटा है, प्रथम चरण में स्थापित तीन इकाईयाँ 660MW. की है, जो सुपर क्रिटिकल बॉयलर तकनीक का उपयोग करती है।
™™दूसरे चरण की दो इकाईयाँ प्रत्येक 500MW. की है। प्रधानमंत्री मनमोहन ¯सह ने 20
सितम्बर 2013 को सिपत ताप ऊर्जा संयंत्र का उद्‌घाटन किया।
जल विद्युत परियोजना
हसदेव-बांगो जल विद्युत परियोजना
™™यह परियोजना हसदेव नदी बायी तट पर कोरबा के माचादोली, कटघोरा गाँव में स्थित है।
™™ इस परियोजना को बहुद्देशीय उपयोग के लिए बनाया गया है।
™™योजना आयोग द्वारा इस परियोजना को मंजूरी मार्च 1984 में दी गई।
™™इस बाँध द्वारा बालको, सी. ई. सी. एल., एन. टी. पी. सी., सी. एस. पी. जी. सी. एल., कोरबा शहर और अन्य औद्योगिक इकाईयों को जल आपू£त करता है।
™™इस परियोजना की क्षमता 3.40MW. है। गंगरेल जल विद्युत संयंत्र
™™ यह परियोजना महानदी पर गंगरेल में स्थित है, यह धमतरी से करीब 13 किमी. दूर है और रायपुर से 90 किमी. दूर है। यह एक बहुउद्देशीय परियोजना है।
™™इसकी कुल क्षमता 10MW. है, जो 4 इकाई में सम्मिलित है जिनकी प्रत्येक क्षमता
2.5MW है। सिकासर जल विद्युत संयंत्र
™™यह पैरी नदी पर स्थित जल विद्युत स्टेशन है जो गरियाबंद से 54 किमी. दूर और रायपुर से 150 किमी. की दूरी पर स्थित है।
™™इस परियोजना का उद्देश्य नदी में बरसात के अतिरिक्त जल को एकत्र कर ऊर्जा निर्माणकरण तथा छोड़े हुए जल को ¯सचाई के लिए प्रयोग करना।
™™इसकी कुल क्षमता 7MW. है, जो 2 इकाई से स्थापित है प्रत्येक 3.5MW. क्षमता की है। मिनी जल संयंत्र
™™ यह कोरबा पश्चिम के ताप विद्युत संयंत्र के लौटते जल का प्रयोग करता है।
™™इस ताप विद्युत घर के लौटते जल नहर, जिस पर पहले उसमें कोई अवरोध नहीं था तथा जल बर्बाद होता था, अब इस बेकार जल से भी बिजली नि£मत की जा रही है जो अच्छा है।
™™इसकी कुल क्षमता 1.7 MW. है, जो कुल 2 इकाई का है तथा प्रत्येक 0.85 MW.
क्षमता की है। बोधघाट जल विद्युत परियोजना (4x 125MW.)
™™यह परियोजना इन्द्रावती नदी पर बारसुर के समीप है जो जगदलपुर से 100 किमी. की दूरी पर स्थित है।
™™पूर्व में यह परियोजना 1979 में स्वीकृत कि गयी थी। हालांकि वन संरक्षण अधिनियम
1980 के बनने से इस परियोजना में अवरोध उत्पन्न हुआ क्योंकि इसके लिए 5704
हेक्टेयर की वन को साफ करना था। इस कारण से भी कार्य रोक दिए गए।

छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (CREDA)

™™छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी की स्थापना 25 मई, 2001 को छत्तीसगढ़ सरकार की ऊर्जा विभाग द्वारा की गई, जिससे अक्षय ऊर्जा के स्रोत और ऊर्जा संरक्षण कार्यों में विभिन्न योजनाएँ बनाई जा सके।
™™यह छत्तीसगढ़ की अध्यक्षता और प्रमुख सचिव के उपाध्यक्षता में छत्तीसगढ़ ऊर्जा मंत्रालय के द्वारा नियंत्रित सोसाइटी अधिनियम 1973 के अन्तर्गत पंजीकृत है।
™™अक्षय ऊर्जा को राज्य में लोकप्रिय बनाने के लिए विकास करने के लिए सी. आर. ईडी. ए. को सरकार की एक नोडल एजेंसी बनाई गई।
™™विभिन्न कार्यक्रम जैसे बायोगैस विकास, सौर ताप सौर फोटो बोल्टिक, दूरस्थ ग्राम विद्युतिकरण और बायोमास गैसी फायर, जो एम. एन. आर. ई. और सी. आर. ई. डी. ए. द्वारा प्रायोजित स्कीम है।
™™इन सभी जिम्मेदारी को निभाते हुए सी. आर. ई. डी. ए. अपने कुशल कर्मचारियों और वित्तीय सहायता के जरिए यह एक संगठन के रूप में कार्य कर रहा है। इसके विस्तृत मानव दक्षता विकास कार्यों को अपनाया है और कर्मचारियों को उपयुक्त माहौल प्रदान करता है।

उद्देश्य (Chhattisgarh GK in Hindi)

(1) छत्तीसगढ़ राज्य में ऊर्जा और ऊर्जा रूपान्तरण गतिविधियों के गैर पारम्परिक और नवीनकरणीय स्रोतों को लोकप्रिय और विकसित बनाना।
(2) राज्य में नए और अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों को लोकप्रिय बनाना और नीतियों का प्रसार करना।
(3) अक्षय ऊर्जा कार्यक्रमों, ऊर्जा दक्षता और उसके संरक्षण में भारत सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ की सहायता करना।
(4) ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता में नए और नवनीकरणीय ऊर्जा के कार्यों का विमोचन, प्रदर्शन, समन्वय प्रचार और प्रसार करना।
(5) छत्तीसगढ़ राज्य में अक्षय ऊर्जा के विस्तार के लिए वित्तीय और यांत्रिकी सहायता प्रदान करना।
गैर परम्परागत ऊर्जा नीति
सौर ।र्जा-छत्तीसगढ़ राज्य उच्च सौर विकिरण और उच्च वर्षा से लाभान्वित है तथा उच्च सौर ऊर्जा उत्पादन की क्षमता रखता है। छत्तीसगढ़ सौर ऊर्जा के उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनने की क्षमता रखता है। ऊर्जा उत्पादन के साथ ही सौर उपकरणों के निर्माण में भी इस राज्य में अपार संभावनाएँ हैं। छत्तीसगढ़ इन लाभों के होने के कारण सौर ऊर्जा उत्पादन का एक अच्छा आवास साबित हो सकता है। सोलर शहर-नवीन अक्षय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा रायपुर और बिलासपुर को सौर शहर बनाने के लिए चुना गया है। अक्षय ऊर्जा स्रोतों की स्थापना के माध्यम से अगले 10 वर्षों में ऊर्जा उपभोग 10 प्रतिशत तक घटाने का लक्ष्य रखा गया है।

पवन ऊर्जा

पवन गतिमान हवा है। पवन का निर्माण पृथ्वी के आवर्तन और सूरज की किरणों के गर्मी कि कारण होता है। धु्रवों की अपेक्षा भूमध्य रेखा पर सूरज की किरणें अधिक पड़ती हैं। भूमध्य क्षेत्र की गर्म हवा हल्का होकर ऊपर उठ जाती है धु्रवों की तरफ चलती है जिसके कारण पवन का निर्माण होता है। पवन में भार होता है तथा गति होती है। गति में ऊर्जा होती है जिसका हम उपयोग कर सकते हैं।
पवन ऊर्जा नीति
(1) छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (सी. आर. ई. डी. ए.) राज्य में पवन ऊर्जा उत्पादन की नोडल एजेंसी है, सी. आर. ई. डी. ए. राज्य की पवन ऊर्जा क्षमता की निगरानी करेगा। निजी क्षेत्रों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
(2) छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत बोर्ड (सी. एस. ई. बी.) विनिर्देशन के अनुसार ग्रीड से जोड़ना और रख रखाव का खर्चा विकास करने वाले को स्वयं उठाना पड़ेगा।
(3) छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक कमीशन के कहे गए दरों पर राज्य सरकार द्वारा नामित एजेंसी ही पवन द्वारा उत्पादित की गई ऊर्जा को खरीद सकता है। अगर कोई खरीददार न मिल पाए या सरकार द्वारा नामित एजेंसी खरीदने से मना कर दे तो निर्माता अपने दरों पर तीसरी पार्टी को ऊर्जा विक्रय कर सकती है।