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वर्ष 2018-19 में विनिर्माण क्षेत्र में सकल राज्य घरेलू उत्पाद (स्थिर भाव) योगदान` 40,40,133 लाख अनुमानित है। औद्योगिक नीति 2018-19 के अंतर्गत विभिन्न औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन/स्टार्टअप योजनाएँ लागू की गई है। राज्य में दो रेल्वे कॉरिडोर ईस्ट एवं वेस्ट की स्थापना प्रस्थावित है जो पूर्ण होने पर राज्य के औद्योगिक विकास में क्रांतिकारी परिणाम आयेंगे। राज्य पुनर्गठन के बाद कोर सेक्ट के विकास पर जोर दिया गया। परिणाम स्वरूप कोर सेक्टर के उत्पाद में काफी वृद्धि हुई है। एक स्थान पर एक जैसे उद्योगों की स्थापना के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक पार्कों की स्थापना की जा रही है। जैसे-मैटल पार्क, इंजीनियरिंग पार्क, मेगा फूड पार्क। इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग पार्क-अटल नगर, जिला रायपुर में 18.56 हेक्टेयर भूमि पर इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग कलस्टर की स्थपना की जा रही है। इस परियोजना की कुल लागत 103.88 करोड़ है। औद्योगिक नीति 2014-19—राष्ट्र में आर्थिक उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण के कारण औद्योगिक परिवेश में बड़े पैमाने में परिवर्तन हो रहे हैं। राज्य में सुनियोजित विकास के लिये वर्तमान में औद्योगिक नीति 2014-19 अपनायी गई है। औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन देने की योजना का विवरण तालिका में दर्शित है। औद्योगिक नीति 2014-10 में पात्र उद्योगों की औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन की योजनाएँ क्र. योजना का नाम योजना के अन्तर्गत दी जाने वाली छूट व रियासतों का विवरण 1. ब्याज अनुदान (सूक्ष्म, लघु मध्यम, वृहद, मेगा) प्रोजेक्ट एवं अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स) सावधि ऋण पर भुगतान किये गये ब्याज को 40प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक अधिकतम सीमा` 10 लाख वार्षिक से 100 लाख वार्षिक, अवधि5 वर्ष से 8 वर्ष तक। 2. स्थायी पूँजी निवेश अनुदान (सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहद, मेगा प्रोजेक्ट एवं अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स) स्थायी पूँजी निवेश का 30 प्रतिशत से 50 प्रतिशत अधिकतम सीमा ` 30 लाख से ` 500 लाख तक 3. विद्युत शुल्क छूट (सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहद, मेगा प्रोजेक्ट एवं अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स) वाणिज्यिक उत्पादन प्रारंभ करने के दिनांक से 5वर्ष से 10 वर्ष तक 4. विद्युत शुल्क छूट (सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहद, मेगा प्रोजेक्ट एवं अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स)1. भूमि, भवन/शेड के क्रय/लीज पर पूर्ण: छूट2. ऋण-अग्रिम से संबंधित विलेखों के निष्पादन पर3. औद्योगिक प्रयोजन हेतु अधिग्रहित भूमि के एंवज में भू-स्वामी परिवारों द्वारा क्रय की गई कृषि भूमि पर4. भारत सरकार/राज्य शासन एवं स्वीकृत औद्यो गिक पार्कों/औद्योगिक क्षेत्रों पर5. बंद/बीमार औद्योगिक इकाई के क्रम पर6. फिल्म उद्योगों7. लॉजिस्टिक हब, वेयर हाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज, ग्रेन साइलो। 5. और क्षेत्रें में भू-आबंटन (सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहद, मेगा प्रोजेक्ट एवं अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स)20 प्रतिशत से प्रतिशत तक भू-प्रब्याजि में छूट। 6. परियोजना प्रतिवेदन अनुदान (सूक्ष्म, लघु, मध्यम, उद्योग) स्थायी पूँजी निवेश का 1 प्रतिशत अधिकतम सीमा` 1 लाख से ` 2 लाख 7. भू-व्यपवर्तन शुल्क में छूट (सूक्ष्म एवं लघु उद्योग) अधिकतम 5 एकड़ भूमि तक, भू-पुनर्निधारण कर में 100 प्रतिशत छूट। 8. गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान (सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग) व्यय का 50 प्रतिशत, अधिकतम ` 1 लाख प्रत्येक प्रमाणीकरण हेतु। 9. तकनीकी पेटेन्ट अनुदान (सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग) व्यय का 50 प्रतिशत, अधिकतम ` 5 लाख 10. प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान (सूक्ष्म लघु, मध्यम, वृहद, मेगा प्रोजेक्ट एवं टल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स) अधिकतम 50 एकड़ भूमि तक, भू-पुनर्निधारण कर में 100 प्रतिशत छूट। व्यय का 50 प्रतिशत, अधिकतम ` 5 लाख 11. मार्जिन मनी अनुदान (सूक्ष्म एवं लघु उद्योग) परियोजना का 25 प्रतिशत, अधिकतम ` 35 लाख 12. औद्योगिक पुरस्कार योजना 1. राज्य स्तर पर– प्रथम द्वितीय, एवं तृतीय पुरस्कार, क्रमश: ` 1 लाख, 0.51 लाख एवं 0.31लाख एवं प्रशस्ति पत्र, (4 श्रेणियों में-सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के समग्र मल्यांकन, अनुसूचित जाति/ जनजाति वर्ग द्वारा स्थापित सूक्ष्म एवं लघु उद्योग, निर्यातक सूक्ष्म एवं लघु उद्योग, महिला उद्यमी द्वारा स्थापित उद्योग)2. जिला स्तर पर-सर्वश्रेष्ठ उद्यमी का पुरस्कार` 25,000 एवं प्रशस्ति पत्र। 13. प्रवेश कर भुगतान से छूट (सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहद्ध, मेगा प्रोजेक्ट एवं अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स)05 वर्ष से 07 वर्ष की अवधि हेतु। 14. विकलांग (नि:शक्त) रोजगार अनुदान (सूक्ष्म, लघु, मध्यम, वृहद, मेगा प्रोजेक्ट एवं अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट्स) स्थायी नौकरी प्रदान करने पर शुद्ध वेतन/पारिश्रमिक की 25 प्रतिशत प्रतिपूर्ति। 15. इनवायरमेंट मैंनेजमेंट प्रोजेक्ट अनुदान कार्बन केड्रिट की प्राप्ति एवं कार्बन फुटप्रिंट की कमी से संबंधित प्रत्येक तकनीकी पर मशीनरी लागत का 25 प्रतिशत, अधिकतम ` 14 लाख।
1 आद्योगिक क्षेत्रों में भू-प्रब्याजि में 100 प्रतिशत छूट एवं भू-भाटक की सांकेतिक दर` 1 प्रति एकड पर भूमि का आबंटन।2 औद्योगिक दृष्टि से विकासशील क्षेत्रों में स्थित औद्योगिक क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक एक औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े क्षेत्रों में स्थित औद्योगिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत तक भू-खण्डों व आरक्षण।3. ` 5 करोड़ तक के पूंजीगत लागत तक के उद्योगों में 25 प्रतिशत मार्जिन मनी अनुदान अधिकतम सीमा ` 40 लाख4. अनुदान के प्रकरणों में सामान्य वर्ग की अपेक्षा 10 प्रतिशत से 35 प्रतिशत तक अधिक अनुदान तथा छूट की अवधि से संबंधित प्रकरणों में 5 वर्ष तक अधिक छूटं।
मूल्य संवर्धित कर एवं केंद्रीय विक्रय कर में रियासत प्रतिपूर्ति-स्थायी पूंजी निवेश का अधिकतम 150 प्रतिशत तक सीमित, अधिकतम समयावधि 10 वर्ष प्रवेश कर भुगतान से छूट-7 वर्ष की अवधि हेतु। विद्युत शुल्क में छूट —10 वर्ष तक छूटकृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2012-19 के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य प्रसंस्करण मिशन की योजनाएँ– खाद्य प्रसंस्करण इकाईयों का तकनीकी उन्नयन/ स्थापना/ आधुनिकीकरण-संयंत्र एवं मशीनरी, तकनीकी सिविल कार्यों की लागत का 25 प्रतिशत, 50,00 लाख। कोल्ड चेन, मूल्य संवर्धन एवं संरक्षण अधोसंरचना का विकास (उद्यानिकी एवं गैर उद्यानिकी क्षेत्र में)- परियोजना लागत का 35 प्रतिशत, 500. 00 लाख। बैंक/ वित्तीय संस्थाओं द्वारा स्वीकृत सावधि ऋण पर 6 प्रतिशत की दर से आया वास्तविक ब्याज 5 वर्ष की अवधि हेतु 200.00 लाख।कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति 2014-19 के अन्तर्गत स्टार्ट–अप छत्तीसगढ़ पैकेज की योजनाएँ भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, के औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग में उद्योग व सेवा संबंधी इकाईयों में वैध पंजीयन प्रमाण पत्र धारकों को)े ब्याज अनुदान-सावधि ऋण पर भुगतान किये गये ब्याज का 75 प्रतिशत की दर से अधिकतम सीमा ` 70 लाख वार्षिक। स्थायी पूंजी निवेश अनुदान- स्थायी पूँजी निवेश अनुदान क्र. श्रेणी अनुदान प्रतिशत अधिकतम राशि (लाख में)1. सूक्ष्म एवं लघु उद्योग 35 602. मध्यम उद्योग 35 703. वृहद उद्योग 35 1104. मेगा उद्योग 40 350 विद्युत शुल्क छूट-शत-प्रतिशत छूट। भूमि के क्रय/लीज पर स्टाम्प शुल्क से पूर्ण छूट। (अ) परियोजना प्रतिवेदन अनुदान-मान्य स्थायी पूंजी निवेश का एक प्रतिशत, अधिकतम` 2.50 लाख। (ब) गुणवत्ता प्रमाणीकरण अनुदान-व्यय का 60 प्रतिशत अधिकतम ` 1.25 लाख। (स) तकनीकी पेटेंट अनुदान-व्यय का 60 प्रतिशत अधिकतम ` 6.00 लाख। (द) प्रौद्योगिकी क्रय अनुदान-व्यय का 60 प्रतिशत अधिकतम ` 6.00 लाख। विभिन्न प्रकार के खनिज पदार्थों की उपलब्धता के कारण राज्य में जहाँ एक ओर खनिज आधारित उद्योगों का विकास हुआ है, वहीं दूसरी ओर वन सम्पदा में धनी होने के कारण राज्य में वन आधारित कई उद्योग स्थापित हुए हैं। खनिज आधारित एवं वन आधारित उद्योगों के अलावा राज्य में कृषि आधारित उद्योगों का भी विकास हुआ है। राज्य के प्रमुख उद्योगों को खनिज आधारित उद्योग वन आधारित उद्योग, कृषि आधारित उद्योग तथा अन्य उद्योग के रूप में विभाजित किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के कुछ प्रमुख उद्योग एवं उनके केन्द्र निम्नलिखित हैं-
प्रदेश में यह उद्योग विकासशील अवस्था में है। छत्तीसगढ़ में पहले सूती वस्त्र उत्पादन कारखाना बंगाल नागपुर कॉटन मिल की स्थापना1862 ई. में तत्कालीन राजनांदगाँव स्टेट के शासक द्वारा की गयी थी। प्रदेश में सूती वस्त्र बनाने के कारखाने विलासपुर और राजनांदगाँव में स्थित है।
कोसा सिल्क का कारखाना रायगढ़, कोरबा और बस्तर जिलों में स्थित है। रेशम उद्योग के विकास हेतु राज्य के 16 जिलों में स्थापित रेशम केन्द्रों के प्रबन्धन एवं उपभोग का अधिकार भूमिहीन रेशम कृमि पालन महिलाओं के समूह एवं हितग्राहियों को दिया गया है।
हंगरी की सहायता से 'भारत एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड' (BALCO) की स्थापना कोरबा में की गई है। इसकी स्थापना 1973 में की गई है। 2001 में भारत सरकार ने इस कम्पनी के कुछ शेयर को निजी क्षेत्र में बेच दिया है।
प्रदेश में 1955 में सोवियत संघ (अब रूस) की सहायता से भिलाई इस्पात कारखाना स्थापित किया गया। यह रायपुर से 21 किलोमीटर पश्चिम में दुर्ग-रायपुर रेलमार्ग पर स्थापित किया गया है। यहाँ फरवरी 1959 से उत्पादन प्रारम्भ हुआ। भिलाई इस्पात संयन्त्र में 3 ओवन भटिय्टाँ ,3 लपट वाली भटिय्टाँ , 6 खुली भटिय्टाँ तथा 4 रौलिंग मिल कार्यरत हैं।
छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण भारत के 10% से अधिक का सीमेन्ट उत्पादन करता है। राज्य में चूना पत्थर की अधिकता के कारण सीमेंट उद्योग का पर्याप्त विकास हुआ है। यहाँ 9 वृहद सीमेंट संयंत्र स्थापित है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख सीमेन्ट कारखानों का संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है-
इस कारखाने की स्थापना एसोसिएटेड सीमेन्ट कम्पनी के द्वारा दुर्ग में की गई है। यह सन् 1965 में स्थापित किया गया। इस कारखाने में आधुनिक शुष्क विधि से पोर्टलैण्ड वात्या भटी्ट स्लैग सीमेन्ट का उत्पादन किया जाता है।
इस कारखाने को 1976 में स्थापित किया गया है। इसकी स्थापना सेंचुरी मिल्स ऑफ बिडला के स्वामित्व में रायपुर से लगभग 25किलोमीटर दूरी पर स्थित तिलदा नामक स्थान पर की गई है।
यह कारखाना रायपुर से लगभग 15 किलोमीटर दूर मान्धार में स्थापित किया गया है। इसकी स्थापना 1970 में हुई थी। यह कारखाना सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम सीमेन्ट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के स्वामित्व में कार्यरत है।
यह कारखाना सीमेन्ट कार्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड द्वारा स्थापित किया गया है। इसकी स्थापना 1980 में की गई थी और 1981 से यहाँ उत्पादन शुरू हो गया है। यह कारखाना अकलतरा रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है।
छत्तीसगढ़ में कागज के कारखाने बिलासपुर और जांजगीर-चांपा में स्थित है।
छत्तीसगढ़ में जूट उद्योग अविकसित अवस्था में है। इस प्रदेश की एकमात्र जूट मिल रायगढ़ में है। इस मिल के लिए कच्चा माल आस-पास के क्षेत्रों से मिलता है।
वर्तमान में राज्य के लगभग 42,000 बुनकर हथकरघा वस्त्र बुनाई रोजगार में लगे हैं। यहाँ प्रतिवर्ष 50 करोंड़ रुपए से अधिक के हथकरघा वस्त्रों का उत्पादन होता है। राज्य में दीनदयाल हथकरघा प्रोत्साहन योजना लागू की गई है। छत्तीसगढ़ में केन्द्रीय सार्वजनिक उद्योग क्र. नाम एवं स्थिति स्थापना वर्ष विवरण1. दक्षिण-पूर्व रेलवे वैगन वर्कशॉप, रायपुर 1967-68 मालगाड़ी के डिब्बों की मरम्मत2. भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड, कोरबा 1975-76 एल्युमिनियम3. भिलाई स्टील प्लांट (मेसर्स हिन्दुस्तान स्टील लिमिटेड)1958-59 कच्चा लोहा, इस्पात4. मांधार सीमेंट वर्क्स, (सीमेंट कार्पोरेशन ऑफ इण्डिया)1970-71 पोर्टलैण्ड सीमेंट5. बंगाल-नागपुर कॉटन मिल्स लि. राजनांदगांव 1894-95 सूती कपड़ा एवं सूत6. बेलाडिला आयरन प्रोजेक्ट, बचेली, जगदलपुर7. साउथ ईस्टर्न कोल फीलडस लि. बिलासपुर8. कृषि उपकरण भिलाई, दुर्ग कृषि उपकरण9. कोरबा सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन, कोरबा 1978 विद्युत उत्पादन10. भिलाई रिफैक्ट्रीज प्लांट, भिलाई (दुर्ग) 1980 अग्निसह ईंटों का निर्माण11. फल सवर्द्धन, रायगढ़ रक्वेश, केचप, पेय12. रायगढ़ पेपर एवं बोर्ड मिल, रायगढ़ स्टॉबोर्ड13. काजू संवर्द्धन इकाई, बस्तर काजू संवर्द्धन14. पंजार संयंत्र, रायपुर पोषण आहार नए औद्योगिक पार्क क्र. पार्क स्थान1. फूड पार्क टेडेसार (राजनांदगांव) और बोरई (दुर्ग)2. एग्रो पार्क बस्तर (केन्द्रीय खाद्य अनुसंधान संस्थान- सलाहकार)3. एल्युमिनियम पार्क कोरबा (बाल्को की मदद से)4. आई.टी. पार्क भिलाई-दुर्ग5. एपॅरेल पार्क रायपुर (रावतभाटा और भानपुरी-प्रत्येक में एक-एक)6. जेम एवं ज्वेलरी पार्क रायपुर7. ऊर्जा उद्यान पार्क रायपुर8. केमिकल जोन टेंडेसरा-मुढ़ीपार के मध्य9. इंजीनियरिंग और रसायन पार्क भिलाई10. एकीकृत अधोसंरचना विकास केन्द्र बिरकोनी (महासमुन्द)
छत्तीसगढ़ क्षेत्र के पुराने समस्त जिलों में राज्य सरकार के औद्योगिक विकास निगम के अधीन 'औद्योगिक विकास केन्द्र' स्थापित हैं। निगम का मुख्यालय रायपुर में स्थित है। यह निगम राज्य के अनवरत औद्योगिक विकास के लिए वृहद् व मध्यम श्रेणी के उद्योगों की स्थापना में अपनी सहायता प्रदान करता है। इन केन्द्रों का विवरण निम्नलिखित है-
यह औद्योगिक केन्द्र राष्ट्रीय राजमार्ग-6 के दोनों तरफ लगभग 440 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित है। इस औद्योगिक केन्द्र में 11,500 लाख रुपए की लागत से 36 उद्योग कार्यरत् हैं जो लगभग 1,200 लोगों को रोजगार प्रदान कर रहे हैं।
यह विकास केन्द्र रायपुर जिले में 700 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित है। यह औद्योगिक परिक्षेत्र रायपुर शहर में राष्ट्रीय राजपथ 200 के बाहरी छोर पर भानपुरी, रावाभाटा, सोरोरा, सोन्डोनगरी, गोंडवारा के घेरे में स्थित है।
यह विकास केन्द्र बिलासपुर जिले में राष्ट्रीय राजपथ 200 पर तिफरा के अंतर्गत 430हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित है, जिसमें यहाँ आबंटन के लिए लगभग 35 हेक्टेयर भूमि मौजूद है। सम्पूर्ण आधुनिक सुविधाओं से सम्पन्न इस औद्योगिक विकास केन्द्र में रेलवे और साउथ ईस्टर्न कोलफील्डस लिमिटेड पर आधारित विभिन्न प्रकार के सहायक उद्योग भी स्थापित हैं।
यह विकास केन्द्र रायपुर जिले में लगभग 1260 हेक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित है। जिसमें 6900 लाख रुपए का निवेश हुआ है तथा यहाँ आवंटन हेतु लगभग 600हेक्टेयर भूमि मौजूद है। इसके अन्तर्गत 3 वृहत् व मध्यम श्रेणी के और 9 लघु उद्योग कार्यरत हैं। यहाँ जल आपूर्ति के लिए निजी क्षेत्र की सहायता से 'खारुन' नदी पर एक 'एनीकट' का निर्माण किया गया है। प्रदेश में तीन नवीन औद्योगिक क्षेत्र-रानी दुर्गावती औद्योगिक क्षेत्र, अंजनी पेण्ड्रा रोड, बिरकोली (महासमुन्द) तथा गिरिवर गंज-नयनपुर (अंबिकापुर) में स्थापित किए जा रहे हैं। उद्योग एक दृष्टि में क्र. जिला औद्योगिक स्थापित उद्योग स्थल1. कोरिया 1. मनेन्द्रगढ़ इंजीनियरिंग, फर्नीचर, राइस एवं 'लोर मिल2. कोरबा 1. कोरबा ताप विद्युत संयंत्र, वायर, फर्नीचर, केमिकल, साबुन उद्योग, एल्युमिनियम उद्योग आदि।3. रायगढ़ 1. रायगढ़ सीमेंट, केबल उद्योग, दाल, 'लोर मिल, ऑयल मिल, कोसा उद्योग, जूट उद्योग2. खरसिया दाल मिल, बीड़ी, राइस मिल, आयल मिल4. जाँजगीर 1. चाँपा आयरन एण्ड स्टील प्लांट, राइस मिल, कोसा उद्योग आदि।2. जांजगीर इंजीनियरिंग, राइस व 'लोर मिल, ईंट उद्योग।3. गोपाल नगर सीमेंट उद्योग।4. अलकतरा 'लोर मिल, सीमेंट उद्योग, राइस मिल।5. बिलासपुर 1. बिलासपुर काँच उद्योग, बर्तन, बीड़ी, बी.ई.सी. फर्टिलाइजर्स, प्लास्टिक, दाल मिल, जूट, केमिकल, साबुन, पेपर मिल।2. लोरमी दाल मिल, फर्नीचर, राइस उद्योग।3. मुंगेली 'लोर मिल, राइस मिल, फर्नीचर, साबुन उद्योग।4. बिवहा 'लोर मिल, दाल मिल, लाख उद्योग आदि।5. तखतपुर राइस मिल6. कोंटा फर्नीचर, लाख उद्योग, राइस मिल।6. जशपुर 1. जशपुर फर्नीचर, जूट निर्मित सामग्री2. कुनकुरी कोसा उद्योग, 'लोर, लाख उद्योग।3. पत्थल गाँव ऑयल, राइस एवं दाल मिल।7. सरगुजा 1. अम्बिकापुर सीमेंट पाइप उद्योग, इंजीनियरिंग, लकड़ी निर्मित सामग्री आदि।2. मैनपाट राइस व दाल मिल, ईंट, कोसा उद्योग एवं ऊनी वस्त्र आदि।8. महासमुन्द 1. महासमुन्द ऑयल मिल, फर्नीचर, इन्जिनियरिंग उद्योग 'लोर, राइस व दाल मिल।9. धमतरी 1. धमतरी दाल मिल, पत्थर उद्योग, स्टील, इंजीनियरिंग ऑयल मिल, राइस मिल।10. दन्तेवाड़ा 1. दन्तेवाड़ा राइस मिल, ऑयल मिल, फर्नीचर इंजीनियरिंग, लाख उद्योग।11. राजनांदगांव 1. राजनांदगांव सूती वस्त्र उद्योग, दाल व ऑयल मिल, स्टील फाइबर उद्योग, इंजिनियरिंग आदि।12. रायपुर 1. उरला एवं सीमेंट, स्टील, केमिकल, इंजीनियरिंग, प्लास्टिक वीरगाँव (रायपुर) उद्योग, बेकरी उद्योग आदि।13. कांकेर 1. कांकेर फर्नीचर उद्योग, लाख, इंजीनियरिंग, आयल मिल, 'लोर मिल उद्योग आदि।14. कवर्धा 1. कवर्धा ऑयल मिल, फर्नीचर, इंजिनियरिंग राइस मिल, दाल व 'लोर मिल आदि।15. दुर्ग 1. भिलाई भिलाई स्टील प्लांट, केबल उद्योग, रसायन एवं लौह उद्योग, औषधि उद्योग।16. बस्तर 1. जगदलपुर स्टील उद्योग, सीमेंट, लकड़ी उत्पादन, टाइल्स उद्योग आदि।
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