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Study Guide: वन (Chhattisgarh GK in Hindi) - Forests
Source: https://www.fatskills.com/chhattisgarh-public-service-commission-cgpsc/chapter/-chhattisgarh-gk-in-hindi-forests

वन (Chhattisgarh GK in Hindi) - Forests

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छत्तीसगढ़ राज्य का भौगोलिक क्षेत्रफल 1,35,191 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के क्षेत्रफल का 4.1 प्रतिशत है। प्रदेश का वन क्षेत्रफल लगभग 59,772 वर्ग किलोमीटर है, जो कि प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्रफल का 44.2 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ राज्य वन क्षेत्रफल की दृष्टि से देश में चौथे स्थान पर है। राज्य के वन आवरण की दृष्टि से छत्तीसगढ़ का देश में तीसरा स्थान है। भारत के कुछ भौगोलिक क्षेत्र का 23.38 प्रतिशत भाग वनाच्छादित है जबकि छत्तीसगढ़ में वनों का क्षेत्रफल कुछ भौगोलिक क्षेत्र का 44.21 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ का वन क्षेत्र भारत में चतुर्थ स्थान पर है। राज्य में आरक्षित वन 25782 वर्ग कि.मी. (43.13 प्रतिशत) संरक्षित वन 24036 वर्ग कि.मी. (40.22 प्रतिशत) अवर्गीकृत वन 9554 वर्ग कि.मी. कुल 59772 वर्ग कि.मी. वनक्षेत्र है। वन एक दृष्टि में वन वर्गीकरण वन क्षेत्र (वर्ग कि.मी. में) प्रतिशत अ. वैधानिक स्थिति आरक्षित 25782.17 43.13 संरक्षित 24036.10 40.22 अवर्गीकृत 9954.13 16.65 योग 59772.40 100.00 वानिकी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भागीदारी देखी जा सकती है, यदि इसे पूर्ण ढंग से लठ्‌ठा, ईंधन की लकड़ी का संग्रहण, गैर इमारती लकड़ी एवं वनोत्पाद से ग्रामीण आय तथा जीवन निर्वाह आरंभ करने की दृष्टि से अवलोकित किया जाए। वन कार्बन अवशोषण कर ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन से मौसम परिवर्तन के दुष्प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। वन पर्यावरण सेवाओं तथा अन्य उत्पादक क्षेत्रों को लाभान्वित करने का भी स्रोत है (यथा-बहाव कृषि के लिए वाटरशेड संरक्षण, वनाधारित मनोरंजन एवं पर्यटन)। अत: बहुत अधिक वन क्षेत्र न केवल राज्य को, बल्कि पूरे देश को उसके महत्वपूर्ण आच्छादन द्वारा भी लाभ पहुंचाता है।

राज्य के वन और उनका वैशिष्ट्‌य

छत्तीसगढ़ राज्य का विस्तार 17o 46′ से 24o 06′ उत्तर अक्षांश तथा 80o 15′ से 84o
51′ पूर्वी देशांतर के मध्य है। राज्य में 4 प्रमुख नदी प्रणालियों क्रमश: महानदी, गोदावरी, नर्मदा और वैनगंगा का जलग्रहण क्षेत्र शामिल है। महानदी, इंद्रावती, हसदेव, शिवनाथ, अरपा, ईब राज्य की प्रमुख नदियाँ हैं। राज्य की जलवायु मुख्यत: सह आर्द्र तथा औसत वार्षिक वर्षा 1200 से 1500 मि.मी. है।
राज्य के वनों को दो प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है यथा उष्ण कटिबंधीय आर्द्र पर्णपातीय वन एवं उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपातीय वन। राज्य की दो प्रमुख वृक्ष प्रजातियाँ साल (शोरिया रोबस्टा) तथा सागौर (टेक्टोना ग्रान्डिस) हैं। इसके अतिरिक्त शीर्ष वितान में बीजा (प्टेरोकार्पस मार्सूपियम), साजा (टर्मिनेलिया टोमेन्टोसा), धावड़ा (एनागाईसिस लैटिफोलिया), महुआ (मधुका इंडिका), तेन्दू (डायोस्पाईरस मेलैनौजाईलान) प्रजातियाँ हैं। मध्य वितान में आंवला (एम्बिलिका ऑफिसिनेलिश), कर्रा (क्लीस्टेन्थस कोलाइनस) तथा बांस (डेन्ड्रोकैलेमस स्ट्रिक्टस) आदि महत्वपूर्ण प्रजातियाँ हैं। भूतल भाग में प्रकार की वनस्पतियाँ हैं जो पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण तो हैं ही, साथ ही वे वन-वासियों के आजीविका का प्रमुख साधन भी हैं। जैव भौगोलिक दृष्टिकोण से छत्तीसगढ़ राज्य डेकन जैव क्षेत्र में शामिल हैं तथा मध्य भारत की प्रतिनिधि वन्य प्राणी जैसे शेर (पेन्थरा टिगरीस), तेन्दुआ (पेन्थरा पार्डस), गौर (बॉस गौरस), सांभर (सेरवस यूनिकोलर), चीतल (एक्सेस एक्सेस), नील गाय (बोसेलाफस ट्रेगोकेमेलस) एवं जंगली सुअर (सस स्क्रोफा) से परिपूर्ण है। दुर्लभ वन्य प्राणी जैसे वन भैंसा (बूबैलस बूबैलिस) तथा पहाड़ी मैना (ग्रैकुला इंडिका) इस राज्य की बहुमूल्य धरोहर हैं जिन्हें क्रमश: राज्य पशु एवं राज्य पक्षी घोषित किया गया है। साल वृक्ष को राज्य वृक्ष घोषित किया गया है। यह राज्य, कोयला, लोहा, बॉक्साईट, चूना, कोस्डम, हीरा, स्वर्ण, टीन इत्यादि खनिज संसाधनों से परिपूर्ण है, जो मुख्यत: वन क्षेत्रों में ही पाये जाते हैं।

विभाग की प्रमुख योजनाएं/कार्यक्रम (Chhattisgarh GK in Hindi)

राज्य के वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन हेतु भारत शासन द्वारा 34 वनमंडलों के लिए कार्य आयोजना स्वीकृत है। राज्य के समस्त वनमंडल के वनक्षेत्रों का डिजीटाईजेशन कार्य पूर्ण किया जा चुका है। कार्य आयोजना की अवधि 10 वर्ष की होती है। योजनावार विवरण निम्नानुसार है-
पर्यावरण वानिकी-शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने हेतु इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में पौधा रोपण, पथ वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्क/पिकनिक स्पॉट का निर्माण एवं उनके रखरखाव का कार्य किया जाता है।
बांस वनों का पुनरोद्धार-इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के बसोड़ों, पानबरेजा परिवारों एवं बांस का काम करने वाले हस्तशिल्प कारीगरों को अधिक मात्रा में अधिक बांस उपलब्ध कराने के उद्‌देश्य से वन एवं वनेत्तेर क्षेत्रों से बिगड़े बांस वनों का सुधार एवं बांस रोपण कराया जाता है। बिगड़े बांस वनों में गुथे हुए बांस के भिरों की सफाई कराकर मिट्‌टी चढ़ाई का कार्य किया जाता है, जिससे अच्छे (कर ले) प्राप्त होते हैं एवं बांस वनों की उत्पादकता में वृद्धि होती है।
पौधा प्रदाय योजना-जन सामान्य में वृक्षारोपण के प्रति अभिरुचि उत्पन्न कर उनकी आर्थिक उन्नति करने तथा वनेत्तर क्षेत्रों में हरियाली के प्रसार करने हेतु रियायती दर पर पौधे योजना अंतर्गत उपलब्ध कराए जाते हैं।
नदी तट वृक्षारोपण योजना-छत्तीसगढ़ के प्रमुख नदियों के तट पर होने वाले भू-क्षरण की रोकथाम कर पारिस्थितिकीय स्थायित्व प्रदान करना।
पथ वृक्षारोपण-राज्य शासन द्वारा सामान्य क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्गों, जिला मुख्य मार्गों तथा ग्रामीण मार्गों के किनारे वृक्षारोपण करने का निर्णय लिया गया है जिसके अंतर्गत पथ वृक्षारोपण एवं रखरखाव कार्य किया जाता है।

छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड (Chhattisgarh GK in Hindi)

शासन द्वारा राज्य में औषधीय पादपों के संरक्षण, संवर्धन, विनाश विहीन विदेहन, प्रसंस्करण तथा विपणन से संबंधित नीति बनाने एवं विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य औषधीय पादप बोर्ड की स्थापना की गई है।
▸ छ.ग. राज्य औषधीय पादप बोर्ड द्वारा औषधीय उद्यान का विकास बोर्ड परिसर में किया गया जिसमें 250 औषधीय प्रजातियों को रोपित किये गये हैं।
▸ बोर्ड द्वारा राज्य के विभिन्न वन मंडलों में दशमूल प्रजातियों का रोपण 150 हे., त्रिफला रोपण 485 हे. मेंहदी रोपण 140 हे. एवं मिश्रित औषधीय वृक्षारोपण 1233 हे. का कार्य कराया गया है।
▸ वर्ष 2018-19 में राज्य में गरियाबंद वनमंडल में मिश्रित औषधीय वृक्षारोपण 216 हेक्टे. हेतु स्वीकृति दी गई है।
▸ वर्ष 2018-19 में एम.पी.डी.ए. डोंगरीगुड़ा दक्षिण कोण्डागांव वनमंडल में कुल 900 हेक्टे. क्षेत्रफल में स्वीकृत प्रदान की गई है।
▸ वर्ष 2018-19 में होम हर्बल गार्डन योजनांतर्गत 15 विभिन्न वनमंडलों में 12.86 लाख पौधे तैयारी हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है।
▸ हर्बल उत्पादों के विक्रय को प्रोत्साहित करने हेतु रेलवे स्टेशन, रायपुर एवं माना विमानतल रायपुर के नये टर्मिनल में रिटेल आउटलेट औषधीय उत्पाद सह-प्रचार केन्द्र स्थापित है। इन विक्रय केन्द्रों में मुख्यत: महिला समूहों द्वारा तैयार किये गये हेल्थ एवं ब्यूटी प्रोडक्ट्‌स का विक्रय किया जाता है।
▸ अप्रैल, 2017 से मार्च 2018 तक कुल 08 लघुवृत्त चित्र का निर्माण साल के औषधीय/ आर्थिक/सामाजिक/जल संग्रहण/क्लाइमेटिक चेंज के महत्व को प्रचार-प्रसार हेतु हिन्दी एवं अंग्रेजी में लघुवृत्त चित्र का निर्माण, एम.पी.सी.ए. जतमई का लघुवृत्त चित्र, हर्बल पर्यटन पर आधारित लघु वृत्त, वनौषधि 2018 कार्यक्रम पर आधारित लघुवृत्त चित्र तथा वैद्यों के जीवन पर आधारित वनौषधियों के सजग प्रहरी का एपिसोड-1 का निर्माण कराया गया है। अप्रैल, 2018 से सितम्बर 2018 तक वैद्यों के जीवन पर आधारित वनौषधियों के सजग प्रहरी का एपिसोड-2 का निर्माण कराया गया है।
▸ अप्रैल, 2018 से सितम्बर, 2018 के बीच बोर्ड के वेबसाईट का आधुनिकीकरण करते हुए, बोर्ड के वेबसाईट का अद्यतन करते हुए बोर्ड के फेसबुक पेज, ट्‌वीटर एकाउंट तथा यू-ट्‌यूब चैनल से लिंक कर दिया गया है।