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Study Guide: छत्तीसगढ़ का भूगोल (Chhattisgarh GK in Hindi - Geography)
Source: https://www.fatskills.com/chhattisgarh-public-service-commission-cgpsc/chapter/-chhattisgarh-gk-in-hindi-geography

छत्तीसगढ़ का भूगोल (Chhattisgarh GK in Hindi - Geography)

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छत्तीसगढ़ की भौगोलिक अवस्थिति

▸ पंखाकृति संरचना वाला छत्तीसगढ़ भारत के छह राज्यों के साथ सीमा बनाता है।
▸ कर्क रेखा (23.5° उत्तरी अक्षांश) राज्य के उत्तरी भाग में स्थित कोरिया, सूरजपुर तथा बलरामपुर (तीन जिलों) से गुजरती है।

अक्षांशीय-देशान्तर विस्तार

▸ छत्तीसगढ़ 17°46′ — 24°6′ उत्तरी अक्षांशों तथा 80°15′ — 84°51′ पूर्वी देशान्तरों के मध्य अवस्थित है।

क्षेत्रफल

▸ छत्तीसगढ़ की लम्बाई 650 किमी (उत्तर-दक्षिण) तथा चौड़ाई 385 किमी (पूर्व-पश्चिम) है।
▸ इसका क्षेत्रफल 1,35,190 वर्ग किमी. (52198.70 वर्ग मील) है जो भारत का 4.11
प्रतिशत है।
▸ तत्कालीन मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ का भू-क्षेत्र 30.47% था। हेक्टेयर में छत्तीसगढ़ का क्षेत्रफल 13603 है। क्षेत्रफल में देश का 10वाँ बड़ा राज्य है।

सीमावर्ती प्रदेश

▸ छत्तीसगढ़ भारत के छह राज्यों के साथ सीमा बनाता है।
▸ इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश, उत्तर-पूर्व में झारखण्ड, दक्षिण-पूर्व में ओडिशा, दक्षिण में तेलंगाना, दक्षिण-पश्चिम में महाराष्ट्र तथा पश्चिम में मध्य प्रदेश अवस्थित है।
▸ ओडिशा के साथ इसकी सर्वाधिक लम्बी सीमा है, जबकि उत्तर प्रदेश के साथ न्यूनतम

भौतिक या प्राकृतिक विभाजन (Chhattisgarh GK in Hindi)

बघेलखण्ड का पठार

▸ प्राचीनतम भूखण्डों में से एक है।
▸ यह छत्तीसगढ़ के उत्तर में स्थित है तथा तीन शैल समूहों से नि£मत है-गोंडवाना, ¯वध्यन और धारवाड़ युगीन आध्‌य महाकल्पी।
▸ ग्रेनाईट, नीस, क्वार्ट्‌जाइट शैलों की यहाँ बहुतायत्ता है।
▸ क्वार्ट्‌ज तथा कांग्लामरेट चट्‌टानों के साथ चूना पत्थर भी पाया जाता है।
▸ यह उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में विस्तारित है, विशेषकर सूरजपुर से लेकर सम्पूर्ण कोरिया जिला तक का क्षेत्र इस पठार का ही हिस्सा है।
▸ यह सोन नदी का मुख्य अपवाह क्षेत्र है।
▸ यहाँ की प्रमुख चोटियों में जैम (1165 मीटर), धनवारसा (1160 मीटर), कैरो (1100
मीटर) तथा मिलान (1075 मीटर) है।

जशपुर-सामरी पाट प्रदेश

▸ सरगुजा से लेकर जशपुर जिले तक विस्तृत एक पठारी क्षेत्र, जिसे पाट नाम से जाना जाता है।
▸ इसका धरातल सीढ़ीनुमा है, जिसमें यत्र-तत्र कई समतल भी विद्यमान हैं।
▸ पाट वस्तुत: समतल शिखर वाले मीसा जैसे पठार हैं। छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा
(400-1000 मीटर) क्षेत्र यही है।
गोरलाटा (सबसे ऊँची चोटी) यहीं स्थित है।
▸ इसमें मुख्यत: आ£कयन शैल अन्तर्वेधी आग्नेय चट्‌टानें हैं। यह प्रदेश छोटा नागपुर (झारखण्ड) के पठार से जुड़ा हुआ है।
▸ इस प्रदेश में तीन प्रमुख नदी प्रवाहित होती हैं-ईब नदी, शंख नदी और कन्हर नदी।

महानदी बेसिन

▸ यह छत्तीसगढ़ का मैदानी भाग है जो इस प्रदेश के बीचों-बीच विस्तृत है।
▸ इसकी ऊपरी सतह का निर्माण महानदी तंत्र द्वारा बिछायी गयी मिट्‌टी से हुआ है, इसे महानदी घाटी क्षेत्र भी कहते हैं।
▸ भूग£भक दृष्टि से कड़प्पा समूह से नि£मत इस बेसिन के दो भाग हैं।
▸ छत्तीसगढ़ का मैदान लगभग 31,600 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैला हुआ है जो अवसादी चट्‌टानों के अपरदन से बना है।
▸ इसमें हसदेव-मांड क्षेत्र, बिलासपुर का मैदानी क्षेत्र, शिवनाथ पार का मैदान, महानदी पार क्षेत्र तथा महानदी-शिवनाथ दोआब शामिल हैं।
▸ मैकल श्रेणी में ही लालवानी चोटी (1126 मीटर) अवस्थित है।
▸ यहाँ औसत ऊँचाई 300 मीटर है। इस क्षेत्र में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, गरियाबन्द, बालोदा बाजार, मुंगेली, बालौद, कबीरधाम, जांजगीर एवं कुछ भाग रायगढ़ का आता है।
▸ जिसकी अन्य सहायक नदियाँ हैं-शिवनाथ, हसदेव, मांड पेरी, जोक, सुरंगी, तेल आदि।

दण्डकारण्य का पठार

▸ दक्षिण छत्तीसगढ़ का यह हिस्सा बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा जिलों में विस्तृत है।
▸ अत्यन्त प्राचीन शैलों से नि£मत इस प्रदेश में ¯वध्य, कडप्पा, प्राचीन लावा, नीस, ग्रेनाइट, आदि शैल समूह विद्यमान हैं।
▸ इस प्रदेश के भी कुछ मुख्य उपविभाजन हैं-उनरी अबुझमाड़ की पहाड़ियाँ, उत्तर पूर्वी पठार, दक्षिणी पठार आदि।
▸ यहाँ की मुख्य नदी इन्द्रावती है जो गोदावरी की सहायक है।
▸ इन्द्रावती की सहायक नदियाँ हैं-नारंगी, बौर¯ढग, मुडरा, निबरा, कोटरी, दंतेवाड़ा, बेरूदी, चिन्तावामू आदि।

धरातलीय संरचना के आधार पर वर्गीकरण (Chhattisgarh GK in Hindi)

पहाड़ी संरचनाएँ-इसमें मैकल श्रेणी, छुरी-उदयपुर पहाड़ियाँ, चांगभाखर-देवगढ़ पहाड़ियाँ, अबुझमाड़ की पहाड़ियाँ आदि पहाड़ी संरचनाएँ आती हैं।
▸ मैकल श्रेणी पश्चिमी छत्तीसगढ़ में चिरोली पहाड़ी से सटी है।
▸ इसका आकार त्रिज्या जैसा है। इसकी औसत ऊँचाई 700 मीटर है।
▸ बदरगढ़ (1176 मी.), झाला पहाड़ (1136 मी.), देवसानी पहाड़ (1125 मी.), यहाँ की प्रमुख चोटियाँ हैं।
छुरीउदयपुर पहाड़ियाँ-कोरबा के छुरी क्षेत्र से लेकर सरगुजा के उदयपुर तक विस्तृत हैं।
▸ यहाँ बिजोरा पहाड़, फुटका पहाड़, करेला पहाड़, लाम पहाड़, मार डोंगर, बारखेवा डोंगर, पवन अखरा जैसे पहाड़ हैं जो खनिजों से भरे पड़े हैं।
▸ यहाँ का बॉक्साइट अयस्क बाल्को (स्टारलाइट) उपयोग में लाता है।
अबुझमाड़ की पहाड़ियाँ-राज्य के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में खड़ी आज भी अबूझ पहेली बनी हुई हैं।
▸ ये अधिकांशतया बस्तर जिले के पश्चिमी भाग में अवस्थित हैं।
अबुझमाड़ छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक वर्षा वाला क्षेत्र है।

चांगभाखर-देवगढ़ पहाड़ियाँ (Chhattisgarh GK in Hindi)

▸ वस्तुत: तीन समानान्तर श्रेणियाँ हैं जो सरगुजा और कोरिया के उत्तरी भागों में विस्तृत हैं। मुस्की पहाड़ (1086 मी.), देवगढ़ पहाड़ (1029 मी.), सोनहत पहाड़ (851 मी.)
इसकी प्रमुख चोटियाँ हैं।
▸ गोंडवाना कल्प चट्‌टानें इसकी विशेषता हैं जिसमें कोयला भरा पड़ा है।

पठारी संरचनाएँ

▸ पठार ऐसे पर्वत हैं जिनका शिखर विस्तृत समतल होता है।
▸ इसके अन्तर्गत दण्डकारण्य का पठार, दुर्ग उच्च भूमि, पेण्ड्रा लोरमी का पठार तथा धमतरी-महासमुंद की उच्चभूमि आती है।
▸ पश्चिमी छत्तीसगढ़ में पेण्ड्रा-लोरमा पठार पेण्ड्रा और लोरमी तहसीलों में अवस्थित है।
▸ इसमें पलका पहाड़ (1088 मी.), लाफागढ़ (1045 मी.), चंदेली पहाड़ (821 मी.), मानगुरू पहाड़, चना डोंगरी, गौरी पहाड़ आदि अवस्थित हैं।
दण्डकारण्य पठार-(बस्तर पठार) मुख्य रूप से मध्य-पूर्वी बस्तर जिले में है, यद्यपि इसका विस्तार कांकेर और दंतेवाड़ा जिलों में भी है।
▸ 600 मीटर औसत ऊँचाई वाले इस पठार को खनिज पठार कहना उचित होगा क्योंकि यहीं बैलाडिला पहाड़ी, केशकाल पहाड़ी, टीकमपल्ली जैसी खनिज पहाड़ियाँ अवस्थित हैं।

धमतरी-महासमुंद उच्च भूमि वस्तुत: (Chhattisgarh GK in Hindi)

▸ धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद तीनों जिलों की पूर्वी सीमा पर अवस्थित पठारी भाग है।
▸ धारी डोंगर (899 मी.), अलंग डोंगर (816 मी.), नरियरपानी (703 मी.), ¯सहावा पर्वत
(585 मी.) यहाँ की मुख्य चोटियाँ हैं। यह पठार देवभोग के कारण सोना-हीरा पठार कहा जाता है।

पाट संरचनाएँ

▸ पाट वस्तुत: ऐसे पठार हैं जिनके किनारे सीढ़ीदार होते हैं। पाट स्थानीय शब्दावली है।
▸ राज्य में मैनपाट, जारंगपाट, जशपुर पाट और सामरी पाट मौजूद हैं जो वस्तुत: जशपुर सामरी पाट के ही उपविभाजन हैं।
▸ मैनपाट सरगुजा की अम्बिकापुर और सीतापुर तहसीलों में अवस्थित है। मति¯रगा पहाड़ी
(990 मी.), टाइगर प्वाइंट्‌स (1152 मी.) जैसे पहाड़ों से आबद्ध मैनपाट को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है।
▸ कन्हर नदी इसे दो पाटों में बाँटती है। पाट में ही छत्तीसगढ़ की सबसे ऊँची चोटी गोरलाटा (1225 मी.) अवस्थित है।
▸ इसी में खुड़िया पठार एवं सरभंजा जलप्रपात स्थित है। मुख्य नदियाँ : कन्हर, मांड।

मैदानी संरचनाएँ

▸ मध्य छत्तीसगढ़ में मैदानी भाग विस्तृत है।
▸ यहाँ छत्तीसगढ़ का मैदान सर्वाधिक विस्तृत मैदान है।
▸ इसके अतिरिक्त बिलासपुर-रायगढ़, मैदान, बस्तर का मैदान, कोटरी बेसिन, कोरबा बेसिन, रिहन्द बेसिन, कन्हर बेसिन, सारंगढ़ बेसिन जैसी मैदानी संरचनाएँ हैं।

छत्तीसगढ़ मैदान (Chhattisgarh GK in Hindi)

▸ राज्य के बीचोंबीच में अवस्थित है।
▸ यह रायपुर, गरियाबन्द, बालौद, बालोदाबाजार, कबीरधाम, दुर्ग, राजनांदगांव, रायगढ़, बिलासपुर में विस्तृत है।
▸ इसके ऊपर रायगढ़ बेसिन अवस्थित है जो मांड और बोराई नदियों की मिटि्‌टयों से नि£मत है।
▸ इसके पश्चिम में कोरबा बेसिन भी अत्यधिक उपजाऊ है।
▸ इसके पश्चिम में हसदेव-रामपुरा बेसिन है। इसके मध्य में कहीं-कहीं छोटी पहाड़ियाँ हैं।
रिहन्द और कन्हर बेसिन राज्य के उत्तरी बिन्दु पर तथा बस्तर का मैदान दक्षिणतम बिन्दु पर अवस्थित है। दुर्ग उच्च भूमि से नीचे कोटरी बेसिन है। छत्तीसगढ़ के शैल समूह (भूग£भक बनावट)
क्र. शैल समूह क्षेत्र श्रेणियाँ/चट्‌टान विशेष तथ्य
1. गोण्डवाना शैल समूह उत्तरी छत्तीसगढ़ (सरगुजा बलरामपुर बघेलखंड पठार रिहन्द-मांड
1. सबसे प्राचीन चट्‌टानें सूरजपुर कोरिया, रायगढ़) घाटी क्षेत्र 2. कोयला, बालू पत्थर के भंडार तलचर-कामठी 3. जीवाश्मों की प्रचुरता श्रेणियाँ
2. आ£कयन शैल समूह लगभग सम्पूर्ण ग्रेनाइट, सिस्ट छत्तीसगढ़ में बिखरा हुआ
1. जीवाश्म रहित चट्‌टानें
2. अधिक गहराई में मौजूद
(50 प्रतिशत भू-भाग)
3. धारवाड़ शैल समूह दण्डकारण्य ग्रेनाइट, नीस की चट्‌टान
1. लोहे की प्रचुरता (आध महाकल्प युगीन) पठारी क्षेत्र बस्तर श्रेणियाँ 2. स्टेल, क्वार्टजाईट माइका की उपलब्धता
3. जीवाश्म रहित
4. कड़प्पा शैल समूह मध्य छत्तीसगढ़ (राज्य का 30 प्रतिशत भू-भाग) महानदी का मैदान रायपुर, श्रेणियाँ
1.
2.
कायान्तरित अपभ्रंश चट्‌टानें चूने की प्रचुरता
5. विंध्यन शैल समूह पश्चिमी छत्तीसगढ़ भांडेर श्रेणी, कैमूर्स श्रेणी
1. चांदी, यूरेनियम का संभावना क्षेत्र
2. नवीनतम पर्वत
6. दक्कन टे्रप (छोटा नागपुर उत्तर-पूर्वी छत्तीसगढ़ (लगभग 10
पाट संरचनाएँ जशपुर-सामरी
1. बॉक्साइट के भंडार का हिस्सा) प्रतिशत भू-भाग) पाट प्रदेश
छत्तीसगढ़ की प्रमुख पहाड़ियाँ
क्र. पहाड़ियाँ विस्तारित क्षेत्र ऊँचाई/दूरी
1. चांगभाखर-देवगढ़ मनेन्द्रगढ़, जनकपुर, प्रतापपुर, सूरजपुर, रामानुजगंज,
600 से 1,000 मीटर पहाड़ियाँ पश्चिमी कुसमी आदि सबसे ऊँची चोटी, देवगढ़,
1,027 मीटर
2. छुरी-उदयपुर की बिलासपुर जिले के हसदेव नदी के पूर्वी भाग से
600 से 1,000 मीटर पहाड़ियाँ रायगढ़ जिले के मध्य
3. मैकाल श्रेणी की पहाड़ियाँ राजनांदगांव की बिलासपुर जिले की सीमा में उत्तर-पूर्व
450 से 1,000 मीटर एवं दक्षिण-पूर्व तक फैली है।
4. अबुझमाड़ की पहाड़ियाँ नारायणपुर तहसील के पश्चिमी भाग से बीजापुर के उत्तरी भाग तक फैली हैं। लम्बाई 100 किमी चौड़ाई 0.8 किमी।

जलवायु (Chhattisgarh GK in Hindi)

▸ छत्तसीगढ़ की जलवायु भारतीय जलवायु का ही प्रतिरूप है अर्थात्‌ उष्णकटिबन्धीय जलवायु।
▸ विशिष्ट भौगोलिक स्थिति तथा अरब खाड़ी शाखा तथा बंगाल खाड़ी दोनों मानसूनी जलवायु का उपभोग होने से यहाँ की जलवायु में विशिष्टता आ जाती है।

तापमान

▸ कर्क रेखा की उपस्थिति इसे अत्यन्त गर्म और अत्यधिक ठन्डा प्रदेश बनाती है।
▸ मई माह सर्वाधिक गर्म तथा दिसम्बर माह सर्वाधिक ठण्डा होता है।
▸ चांपा यहाँ का सर्वाधिक गर्म क्षेत्र तथा अंबिकापुर-कुसमी- मैनपाट (सरगुजा, बलरामपुर) सर्वाधिक ठण्डा क्षेत्र है।
▸ सरगुजा तथा बस्तर (उत्तरी और दक्षिण छत्तीसगढ़ अधिक गर्मी और अधिक सर्दी के क्षेत्र तथा मध्य छत्तीसगढ़ अधिक गर्मी और साधारण सर्दी के क्षेत्र हैं। वर्षा
▸ प्रदेश में वर्षा मानसूनी जलवायु से होती है, विशेषकर बंगाल की खाड़ी से।
▸ छत्तीसगढ़ में वर्षा का औसत 141.82 सेमी है जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
▸ यहाँ 120 सेमी से 187.5 सेमी तक वर्षा होती है। अधिकांश वर्षा जुलाई माह में होती है, वैसे जून से सितम्बर का समय वर्षा ऋतु का है।
▸ अबुझंमाड़ (बीजापुर) में सर्वाधिक 187.5 सेमी वर्षा होती है।
▸ सबसे कम वर्षा वाले क्षेत्र हैं-मैकाल पहाड़ी का वृष्टि छाया क्षेत्र एवं दक्षिण-पश्चिम लोरमी पठार जहाँ 120 सेमी से कम वर्षा होती है। ग्रीष्म ऋतु
▸ मार्च से जून तक राज्य में गर्मी रहती है।
▸ मई माह सर्वाधिक गर्म रहता है जब पारा 45º से को छूने लगता है।
▸ चांपा इस समय राज्य का सबसे गर्मतम स्थान बन जाता है।
▸ कर्क रेखा की उपस्थिति इस उष्णता को और तीक्ष्ण कर देती है जो सरगुजा के प्रतापपुर से होकर गुजरती है। शीत ऋतु
▸ नवम्बर से फरवरी तक रहती है।
▸ यहाँ कड़ाके की सर्दी पड़ती है, विशेषकर सरगुजा तथा दण्डकारण्य में। सरगुजा का अम्बिकापुर (कुसमी-मैनपाट) सर्वाधिक ठण्डा हो जाता है जहाँ का तापमान 4º से. तक आ जाता है और विशेषकर कुसमी-मैनपाट में तो पारा 0º से. तक गिर जाता है।
▸ दिसम्बर माह सर्वाधिक ठण्डा रहता है। तीन जलवायुविक क्षेत्र (क) उत्तरी छत्तीसगढ़ का क्षेत्र-यह गर्मी में अत्यधिक गर्म तथा ठण्ड में सर्वाधिक ठण्डा रहता है। जलवायु आर्द्र है। (ख) दक्षिण छत्तसीगढ़ का क्षेत्र-दण्डकारण्य का पठारी क्षेत्र गर्मी में सामान्य से अधिक गर्म तथा ठण्ड में सामान्य से अधिक ठण्डा रहता है। जलवायु ठण्डी और नम रहती है। (ग) मध्य छत्तीसगढ़ का क्षेत्र-गर्मी में सर्वाधिक गर्म तथा ठण्ड में सामान्य ठण्डा। जलवायु गर्म और सम है।

मिटि्‌टयाँ (Chhattisgarh GK in Hindi)

▸ छत्तीसगढ़ में लाल और पीली मिट्‌टी की बाहुल्यता है।
▸ यद्यपि लैटराइट, काली, बलई और दोमट मिट्‌टी भी यहाँ पायी जाती है।
▸ भारतीय भूमि एवं मृदा सर्वेक्षण विभाग ने छत्तीसगढ़ की मिट्‌टी को 5 भागों में वर्गीकृत किया है। लैटराइट मिट्‌टी :
▸ बहुत कम उपजाऊ है।
▸ इसमें रेत, कंकड़, पत्थर बहुतायत मिले होते हैं।
▸ इसमें ह्‌यूमस, N2, पोटाश, चूना आदि की कमी रहती है।
▸ यह लाल चट्‌टानों की टूटन से निर्मित है।
▸ मुख्य रूप से सरगुजा के मैनपाट, बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर, बेमेतरा, जगदलपुर (बस्तर) में मिलती है।
▸ pH मान 7 से अधिक होता है।
▸ इसमें ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी जैसी मोटी फसलें होती हैं।
▸ आलू (मैनापाट), तिलहन आदि भी होता है। लाल-दोमट मिट्‌टी
▸ राज्य के 10 – 15 प्रतिशत क्षेत्र में विस्तारित इस मिट्‌टी में लोहे का अंश अधिक होता है। ग्रेनाईट, आर्कियन्स शैलों से उत्पन्न है।
▸ मुख्य रूप से दक्षिण छत्तीसगढ़ में पायी जाती है।
▸ इसमें खरीफ की धान अच्छी होती है।
▸ नीस जैसी अम्लरहित चट्‌टानों से निर्मित इस मिट्‌टी में नदियों की मिट्‌टी भी मिली होती है।
▸ खरीफ की फसलों (ज्वार, बाजरा, चावल) के लिए उपर्युक्त है।
▸ इसे मटासी भी कहते हैं। मुख्य क्षेत्र-द.पू. बस्तर क्षेत्र (कोन्टा/दन्तेवाड़ा)। काली मिट्‌टी
▸ स्थानीय लोग इसे भर्री या कन्हर भी कहते हैं।
▸ लोहा, चूना आदि की प्रधानता के साथ इसमें आर्द्रता ग्रहण करने की अत्याधिक क्षमता होती है।
▸ अत: इसे ह्‌यूमस मिट्‌टी भी कहते है।
▸ यह बैसाल्ट (दक्कन ट्रेप) शैलों से उत्पन्न है।
▸ इसका pH मान 6.3 — 6.4 होता है।
▸ दक्कन टे्रप से निर्मित इस मिट्‌टी में लोहे की उपस्थिति इसे काला रंग देती है।
▸ इसमें चूने की मौजूदगी, इसकी ह्‌यूमस को बढ़ा देती है। कपास, गेहूँ, गन्ना, चना के लिए उपर्युक्त है। मुख्य क्षेत्र- रायपुर, बालौदाबाजार, बिलासपुर, मुंगेली, प. राजनांदगांव, कवर्धा। लाल-पीली मिट्‌टी
▸ राज्य के 55 प्रतिशत भाग में यह पायी जाती है।
▸ गोण्डवाना क्रम की चट्‌टानों से निर्मित यह मिट्‌टी कम उपजाऊ होती है।
▸ इसमें ह्‌यूमस तथा N2 काफी कम होते हैं जबकि चूने की प्रधानता होती है।
▸ इसका pH मान 5.5 से 8.5 के मध्य है।
▸ यह धान फसल के लिए उपयुक्त है।
▸ इसका अस्त्तिव लगभग पूरे छत्तीसगढ़ में यहाँ वहाँ दिखाई देता है। मुख्य क्षेत्र:- कोरिया, सरगुजा, सुरजपुर रायगढ़, बस्तर, दुर्ग, बलरामपुर, रायपुर, बिलासपुर, गरियाबन्द, जांजगीर, धमतरी, महासमुंद, जशपुर, कोरबा, कवर्धा आदि। लाल-बलुई मिट्‌टी
▸ राज्य के लगभग 20 प्रतिशत क्षेत्र में फैली लाल-बलुई मिट्‌टी ग्रेनाइट और नीस चट्‌टानों की अवशेष है।
▸ इसमें लौह अंश अधिक पाया जाता है तथा ह्‌यूमस और पोटाश बेहद कम।
▸ इसमें कंकड़, बालु जैसे पत्थर पाये जाते हैं।
▸ महीन रवेदार तथा रेत कण युक्त यह मिट्‌टी मोटे अनाजों के उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
मुख्य क्षेत्र-दुर्ग, बालोद, राजनांदगांव, बेमतरा, दण्डकारण्य का क्षेत्र।

अपवाह प्रणाली (Chhattisgarh GK in Hindi)

▸ महानदी छत्तीसगढ़ की जीवन-रेखा है। इसे नीलोत्पला तथा महानन्दा भी कहा जाता है। बस्तर की नदियों को छोड़कर छत्तीसगढ़ की अन्य प्रमुख नदियाँ-शिवनाथ, अरपा, हसदेव, पैरी, सोण्ढूर, जोंक आदि महानदी से मिलकर इस नदी का हिस्सा बन जाती है। इसके अन्तगर्त महासमुन्द, राजनांदगांव, धमतरी, कवर्धा तथा रायगढ़ आदि जिलों का विस्तार आता है।

महानदी प्रवाह प्रणाली (Chhattisgarh GK in Hindi)

▸ महानदी प्रवाह प्रणाली में महानदी प्रमुख नदी है।
▸ प्रदेश में इसका अपवाह क्षेत्र मुख्यत: कबीरधाम, दुर्ग, जाँजगीर-चाँपा, रायपुर, बिलासपुर तथा रायगढ़ जिलों में है।
▸ महानदी का विकास पूर्ण रूप से स्थलखण्ड के ढाल के स्वभाव के अनुसार हुआ है। महानदी
▸ महानदी को 'छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा' कहा जा सकता है।
▸ महानदी को 'चित्रोत्पला', 'नीलोत्पला', 'महानन्दा', अथवा 'कनकनन्दिनी' भी कहते हैं।
▸ यह धमतरी के निकट सिहावा पर्वत से निकलकर रायपुर तथा जाँजगीर-चाँपा जिले की सीमा निर्धारित करती है।
▸ दक्षिण की ओर से मिलने वाली सहायक नदियों में शिवनाथ, खाल, सोण्ढूर, पैरी, सूखा, जोंक और लात प्रमुख हैं, जबकि उत्तर की ओर से हसदेव, माण्ड, केलो, अरपा, ईब आदि इसकी सहायक नदियाँ हैं।
▸ महानदी को मुख्यत: तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है- ऊपरी महानदी बेसिन
▸ इसका अधिकांश भाग बस्तर तथा रायपुर में है।
▸ सिहावा पर्वत से निकलकर एक संकरी घाटी से होती हुई उत्तर-पश्चिम की ओर लगभग 50 किमी दूरी तक प्रवाहित होकर बस्तर में कांकेर के निकट स्थित पानीडोंगरी पहाड़ियों तक पहुँचती है।
▸ यहाँ यह पूर्व की ओर हो जाती है।
▸ यहाँ पर पैरी एवं तेल नदी महानदी में मिलती है।
▸ बस्तर में इसकी लम्बाई 64 किमी है तथा प्रवाह क्षेत्र 2,640 वर्ग किमी है। मध्य महानदी बेसिन
▸ इसके अनतर्गत दुर्ग, मध्य रायपुर और बिलासपुर जिले का कुछ भाग सम्मिलित है।
▸ यह सम्पूर्ण क्षेत्र महानदी की प्रमुख सहायक शिवनाथ नदी का जलग्रहण क्षेत्र है, जिसमें उत्तरी-पश्चिमी एवं दक्षिणी सीमान्त उच्च भूमि से निकलने वाली सभी सहायक नदियाँ एवं नाले भी आकर मिलते हैं। निचला महानदी बेसिन
▸ इसके अन्तर्गत बिलासपुर, रायपुर तथा रायगढ़ जिले आते हैं।
▸ शिवनाथ महानदी के संगम स्थल से महानदी एक तीव्र मोड़ लेकर बिलासपुर और रायपुर जिलों के मध्य एक प्राकृतिक सीमा बनाती है, जो पूर्वी ढलान की ओर प्रवाहित मध्य प्रदेश से बाहर निकल जाती है।
▸ इस क्षेत्र में इसके उत्तर की ओर हसदेव, माण्ड एवं ईब नदियाँ तथा दक्षिण की ओर से जोंक एवं सुरंगी आकर मिलती हैं। शिवनाथ नदी
▸ शिवनाथ नदी महानदी की सबसे प्रमुख तथा सबसे बड़ी सहायक नदी है।
▸ इसका उद्‌गम स्थल राजनांदगांव उच्च भूमि में अम्बागढ़ तहसील की 625 मी ऊँची पानाबरस पहाड़ी है।
▸ इसकी सहायक नदियों में हाँफ, आगर, मनियारी, अरपा, खारून, लीलागर, तान्दुला, खरखरा, अमनेरा, खोरसी, जमुनियाँ आदि प्रमुख हैं।
▸ इस नदी के किनारे प्रमुख स्थान-अम्बागढ़ चौकी, राजनांदगांव, दुर्ग, धमधा, नान्दघाट अवस्थित हैं। मनियारी नदी
▸ यह नदी बिलासपुर जिले के उत्तर-पश्चिम में लोरमी पठार के सिंहावल नामक स्थल से निकलती है।
▸ यह दक्षिण-पूर्वी भाग में बिलासपुर तथा मुंगेली तहसील की सीमा बनाती हुई प्रवाहित होती है।
▸ मनियारी की सहायक नदियाँ आगर, छोटी नर्मदा तथा घोंघा हैं। इनके उद्‌गम मुखण्डा पहाड़ बेलपास के कुण्ड से तथा लोरमी के पहाड़ी क्षेत्र हैं।
▸ छोटी नर्मदा का उद्‌गम स्थान बेलपा, इस क्षेत्र का पवित्र स्थल माना जाता है।
▸ मनियारी नदी पर खुड़िया अथवा मनियारी जलाशय का निर्माण किया गया है। लीलागर नदी
▸ लीलागर नदी का उद्‌गम कोरबा की पूर्वी पहाड़ी है।
▸ यह कोरबा क्षेत्र से निकलकर दक्षिण में बिलासपुर और जांजगीर तहसील की सीमा बनाती हुई, शिवनाथ नदी में मिल जाती है।
▸ रायगढ़ जिले में नदी का प्रवाह क्षेत्र 960 वर्ग किमी है तथा नदी की लम्बाई 33 किमी है।
▸ बिलासपुर जिले में नदी का प्रवाह क्षेत्र 1,373 वर्ग किमी तथा नदी की लम्बाई 102
किमी है। अरपा नदी
▸ अरपा नदी भी महानदी की एक सहायक नदी है।
▸ इसका उद्‌गम पेण्ड्रा लोरमी के पठार में स्थित खोडरी पहाड़ी से हुआ है।
▸ प्रदेश में इसकी लम्बाई 100 किमी है।
▸ इसकी सहायक नदी खारून से रतनपुर के पास खन्दाघाट नामक जलाशय का निर्माण किया गया है। तान्दुला नदी
▸ तान्दुला नदी शिवनाथ नदी की प्रमुख सहायक नदी है।
▸ तान्दुला नदी का उद्‌गम कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर के उत्तर में स्थित पहाड़ियाँ हैं।
34 किमी प्रवाहित होने के पश्चात्‌ इस नदी में बालोद तथा आदमाबाद के पास एक नाला मिलता है।
▸ इस नदी का प्रवाह क्षेत्र 20,140 वर्ग किमी तथा लम्बाई 64 किमी है। खारून नदी
▸ खारून नदी शिवनाथ नदी की प्रमुख सहायक नदी है।
▸ इस नदी का उद्‌गम दुर्ग किले के दक्षिण-पूर्व में पेटेयुवा के समीप है। यह नदी 80
किमी उत्तर की ओर प्रवाहित होकर जामघाट के समीप शिवनाथ में मिल जाती है।
▸ दुर्ग जिले में नदी की लम्बाई 128 किमी है तथा प्रवाह क्षेत्र 19,980 वर्ग किमी है। यह जिले के प्रवाह क्षेत्र का 23.0% है।
▸ रायपुर जिले में नदी की लम्बाई 80 किमी तथा प्रवाह क्षेत्र 2,700 वर्ग किमी है। पैरी नदी
▸ पैरी नदी महानदी की प्रमुख सहायक है।
▸ इसका उद्‌गम स्थल रायपुर जिले की बिन्द्रानवागढ़ के समीप लगभग 500 मी ऊँची भातृगढ़ पहाड़ी है।
▸ यह नदी उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बहती हुई राजिम में महानदी से मिलती है।
▸ रायपुर जिले में नदी की लम्बाई 90 किमी है तथा प्रवाह क्षेत्र 3,000 वर्ग किमी है। केलो नदी
▸ इसका उद्‌गम स्थल लुडेग पहाड़ी है, जो रामगढ़ जिले की घरघोड़ा तहसील में है।
▸ महादेव पाली नामक स्थान पर यह महानदी में मिल जाती है। जोंक
▸ यह नदी रायपुर के पूर्वी भाग से निकलकर शिवरीनारायण के निकट महानदी में मिलती है। इसका कुल प्रवाह क्षेत्र 2,480 वर्ग किमी है। सुरंगी नदी
▸ यह नदी रायगढ़ के दक्षिणी भाग से निकलकर लखमोरा के पास ओंग नदी में मिलती है। ओंग ओडिशा के सराद्रपती के पास महानदी से मिलती है। दूधी नदी
▸ इसका उद्‌गम स्थान मलाजकुण्डम पहाड़ी से हुआ है।
▸ यह पूर्व की ओर बहकर महानदी में मिल जाती है माण्ड नदी
▸ माण्ड नदी अम्बिकापुर जिले के मैनपाट से निकली है।
▸ यह सरगुजा, जशपुर, जांजगीर-चाँपा जिलों में प्रवाहित होती हुई, जांजगीर जिले में चन्द्रपुर के समीप महानदी में मिल जाती है।
▸ इसकी प्रदेश में कुल लम्बाई 155 किमी है। बोरई नदी
▸ बोरई नदी कोरबा के पठार से निकलकर दक्षिण की ओर प्रवाहित होकर महानदी में मिलती है।
▸ इसका प्रवाह क्षेत्र लगभग 1,810 वर्ग किमी है। हाँफ नदी
▸ इसका उद्‌गम स्थल कांदावाड़ी पहाड़ी है।
▸ यह शिवनाथ नदी की सहायक नदी है। ईब नदी
▸ यह महानदी की सहायक नदी है।
▸ इसका उद्‌गम स्थल जशपुर जिले के बगीचा तहसील में रानीझूला नामक स्थान है। इसकी प्रदेश में कुल लम्बाई 87 किमी है।
▸ ईब नदी अपने रेत में पाए जाने वाले प्राकृतिक स्वर्ण कणों के लिए भी प्रसिद्ध है। हसदेव नदी
▸ यह नदी कोरबा के कोयला क्षेत्र में तथा चाँपा मैदान में प्रवाहित होने वाली महत्वपूर्ण नदी है। इसका उद्‌गम स्थल कोरिया की पहाड़ियाँ हैं।
▸ ये नदी उद्‌गम स्थल से निकलकर मार्तन एवं उपरोड़ा की चट्‌टानों एवं सघन वनाच्छादित धरातल में प्रवेश करती है, जो कठघोरा के निकट स्थित मैदानी भाग का उत्तर-पूर्वी किनारा है।

गोदावरी प्रवाह प्रणाली (Chhattisgarh GK in Hindi)

▸ गोदावरी प्रवाह प्रणाली का बहुत कम हिस्सा छत्तीसगढ़ में है।
▸ इसका विस्तार दक्षिण जिले कांकेर, बस्तर तथा दन्तेवाड़ा के अन्तर्गत है।
▸ बस्तर जिले का 93% तथा राजनांदगांव जिले का 21% भाग गोदावरी बेसिन में है। गोदावरी इस प्रवाह क्रम की प्रमुख नदी है।
▸ अन्य नदियाँ इन्द्रावती, सबरी आदि हैं। गोदावरी नदी
▸ गोदावरी का उद्‌गम महाराष्ट्र में नासिक के दक्षिण-पश्चिम में स्थित त्र्यम्बक की पहाड़ी है।
▸ गोदावरी नदी छत्तीसगढ़ की दक्षिणी सीमा बनाती हुई प्रवाहित होती है।
▸ गोदावरी की सहायक नदियाँ इन्द्रावती, सबरी, कोटरी, कोहका, बोध आदि हैं।
▸ बस्तर जिले में नदी की लम्बाई 24 किमी एवं जिले में इसका प्रवाह क्षेत्र 4,240 वर्ग किमी है, जो जिले के प्रवाह क्षेत्र का 10.8% है।
▸ राजनांदगांव में नदी का प्रवाह क्षेत्र 2,558 वर्ग किमी है। इन्द्रावती नदी
▸ इन्द्रावती नदी कालाहाण्डी (ओडिशा) जिले में स्थित 4 हजार फीट ऊँची मुंगेर पहाड़ी से निकली है।
▸ यह पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हुई जगदलपुर जिले से 40 किमी दूर पर चित्रकोट जलप्रपात बनाती है।
▸ यह महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ की सीमा बनाती हुई दक्षिण दिशा में प्रवाहित होती है और अन्त में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आन्ध्र प्रदेश के सीमा संगम पर भोपालपट्‌टनम के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर स्थित भद्रकाली के समीप गोदावरी में मिल जाती है।
▸ इसकी प्रदेश में लम्बाई 264 किमी है।
▸ इसकी प्रमुख सहायक नदियों में कोटरी, निबरा, बोराडिग, नांरगी उत्तर की ओर से तथा नन्दीराज, चिन्तावागु इसके दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी दिशाओं में मिलती हैं।
▸ दक्षिण-पश्चिम की ओर डंकिनी और शंखिनी नदियाँ इस नदी में मिलती हैं। इस नदी पर बोध घाटी परियोजना प्रस्तावित है।
▸ इस नदी के किनारे प्रमुख नगर जगदलपुर, बारसुर हैं। कोटरी नदी
▸ कोटरी नदी इन्द्रावती नदी की सबसे लम्बी सहायक नदी है।
▸ इसका उद्‌गम राजनांदगांव जिले की महोला तहसील से हुआ है।
▸ इसका अपवाह क्षेत्र दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर राजनांदगांव के उच्च भूमि में है।
▸ यह उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हुई राजनांदगांव, कांकेर, बस्तर जिलों में होती हुई महाराष्ट्र में प्रवेश कर इन्द्रावती नदी में मिलती है। डंकिनी और शंखिनी
▸ दक्षिण-पश्चिम में इन्द्रावती की सहायक नदियाँ डंकिनी तथा शंखिनी हैं।
▸ डंकिनी नदी किलेपाल एवं पाकनार की डाँगरी डोंगरी से निकलती है।
▸ शंखिनी का उद्‌गम बैलाडीला पहाड़ी के 4,000 फीट ऊँचे नन्दीराज शिखर से हुआ है।
▸ डंकिनी-शंखिनी का संगम दन्तेवाड़ा में होता है। नारंगी नदी
▸ नारंगी नदी का उद्‌गम स्थल जगदलपुर जिले की उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित मकड़ी नामक स्थान पर है।
▸ नारंगी नदी चित्रकोट प्रपात के निकट इन्द्रावती में मिलती है।
▸ इसमें उत्तर-पूर्व बस्तर की कोण्डागाँव तहसील की अधिकांश भूमि का जल संगृहीत होता है। सबरी नदी
▸ सबरी नदी को कोलाब भी कहते हैं।
▸ इसका उद्‌गम स्थल ओडिशा के कोरापुट जिले में हुआ है
▸ यह गोदावरी की दूसरी बड़ी सहायक नदी है।
▸ यह दन्तेवाड़ा जिले में पश्चिम से पूर्व फिर उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित होते हुए आन्ध्र प्रदेश के खम्मम जिले में भद्राचलम के पश्चिम में लगभग 50 किमी की दूरी पर गोदावरी में मिल जाती है।
▸ इसकी प्रदेश में कुल लम्बाई 173 किमी है। इस नदी में स्टीमर तथा नाव द्वारा परिवहन होता है। बोध नदी
▸ बोध नदी राजनांदगांव जिले की कुलझारी पहाड़ी से निकलती है।
▸ यह वेनगंगा प्रवाह तन्त्र की एक शाखा है, जो राजनांदगांव जिले की पश्चिमी सीमा का निर्धारण करती हुई महाराष्ट्र में प्रवेश कर मध्य की दक्षिण-पूर्वी सीमा बनाती हुई बालाघाट जिले में वेनगंगा से मिल जाती है।

गंगा नदी प्रवाह प्रणाली (Chhattisgarh GK in Hindi)

▸ गंगा नदी की प्रवाह प्रणाली का विस्तार प्रदेश के 15% भाग में है।
▸ बिलासपुर जिले का 5% भाग गंगा बेसिन के अन्तर्गत है।
▸ रायगढ़ जिले का 14% भाग तथा सरगुजा जिले का 7% से 8% भाग गंगा बेसिन के अन्तर्गत है।
▸ इस नदी क्रम के अन्तर्गत गंगा नदी तथा सोन नदी की सहायक नदियाँ कन्हार, रेहार, गोपद, बनास, बीजाल, सोप आदि नदियाँ आती है। रिहन्द नदी
▸ रिहन्द नदी का उद्‌गम स्थल मतिरिंगा पहाड़ी के पास से हुआ है।
▸ यह सरगुजा जिले में दक्षिण से उत्तर की ओर प्रवाहित होती हुई उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के चोपन के समीप सोन में मिल जाती है।
▸ छत्तीसगढ़ में इसकी लम्बाई 145 किमी है।
▸ प्रदेश की सीमा पर रिहन्द बाँध बनाया गया है, जिसका आधा हिस्सा उत्तर प्रदेश में (गोविन्द बल्लभ पन्त सागर) पड़ता है।
▸ इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ गोदावरी, मोरना, माहन आदि हैं। कन्हार नदी
▸ कन्हार नदी का उद्‌गम स्थल बगीचा तहसील की बखोना चोटी में है।
▸ यह जशपुर जिले की उत्तारी सीमा से निकलकर सरगुजा जिले में दक्षिण-पूर्व में पूर्वाेत्तर की ओर छत्तीसगढ़-झारखण्ड सीमा बनाते हुए उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में प्रवेश कर चोपन रेलवे स्टेशन से कुछ दूरी पर कोटा नामक स्थान के समीप सोन में मिल जाती है।
▸ इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ सोण्ढूर, गलफुला एंव पेंगन हैं।
▸ इसकी प्रदेश में कुल लम्बाई लगभग 115 किमी है। सोन नदी
▸ यह गंगा की सहायक नदी है।
▸ इसका उद्‌गम स्थल बंजारी पहाड़ी है।
▸ यह पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हुई गंगा में मिल जाती है।
▸ इसकी सहायक नदियाँ रिहन्द, गोपद, बनास, कन्हार एवं बीजाल हैं।

नर्मदा प्रवाह प्रणाली (Chhattisgarh GK in Hindi)

▸ कबीरधाम जिले में बहने वाली बंजर, टाण्डा एवं उसकी सहायक नदियाँ नर्मदा प्रवाह प्रणाली के अन्तर्गत हैं।
▸ छत्तीसगढ़ में नर्मदा प्रवाह प्रणाली की नदियों का प्रवाह क्षेत्र 710 वर्ग किमी क्षेत्र में है। मैकाल श्रेणी महानदी प्रवाह क्रम को नर्मदा प्रवाह क्रम से अलग करती है।

प्रमुख जलप्रपात (Chhattisgarh GK in Hindi)

खुरसेल झरना- नारायणपुर के खुरसेल घाटी में गुड़ाबेड़ा के निकट स्थित है।
रक्सगण्डा बपात- बलरामपुर जिले में चाँदीथाना एवं बंगली नामक स्थान के समीप रेण्ड नदी पर स्थित है।
तीरथगढ़ जलबपात- जगदलपुर के निकट काँगेर घाटी क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा (300 फीट) जलप्रपात है। मुनगाबहरा नदी पर इसका पानी गिरता है।
चित्रकूट जलबपात- भारत का नियाग्रा के नाम से प्रसिद्ध इन्द्रावती नदी पर बस्तर जिले में जगदलपुर से 40 किमी की दूरी पर स्थित यह देश का सबसे चौड़ा एवं सर्वाधिक जलराशि वाला जलप्रपात है, लगभग पौन किमी चौड़ाई की सतह से लगभग
90 फीट नीचे पानी प्रवाहित होता है। चित्रकोट, चितरकोट, चित्रकूट आदि इसके अन्य नाम हैं।
अमृतधारा जलबपात- कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ तहसील के बरबसपुर नामक सथान के पास हसदेव नदी पर अमृतधारा जलप्रपात स्थित है। इसके निकट ही तपसी बाबा का आश्रम है।
कोठली जलबपात- बलरामपुर जिले के डीपाडीह के इसके निकट कन्हार नदी में स्थित है।
मेन्दरी घूमड़/हाथी दरहा-चित्रकोट बारसूर मार्ग पर मटनार नाले पर।
मिलकुलवाड़ा या हान्दावाड़ा इन्दुल– इन्द्रावती नदी पर हान्दावाड़ा के निकट स्थित है।
पुलपाड़ इन्दुल-दन्तेवाड़ा-सुकमा मार्ग पर पुलपाड़ ग्राम की पहाड़ियों पर स्थित जलप्रपात।
मण्डवा जलबपात- बस्तर का तोकापाल विकासखण्ड।
चर्रे-मुर्रे जलबपात-नारायणपुर जिले में आमाबेड़ा-अन्तागढ़ वनमार्ग पर पिंजाडिन घाटी में स्थित है। रानीदरहा जलप्रपात
▸ सुकमा जिले के काण्डा तहसील के विकासखण्ड 'छिन्दगढ़' में ग्राम तालनार के पुजारी रास में यह दरहा है।
▸ यहाँ शबरी नदी का जल अत्याधिक गहराई के कारण ठहरा हुआ प्रतीत होता है।
काँगेर मारा- बस्तर जिले में कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में कांगेर नदी पर स्थित है।
▸ यहीं निकट ही भैसादरहा नामक स्थान पर प्राकृतिक रूप से मगरमच्छ मिलते हैं।
सतधारा बपात-इन्द्रावती नदी पर बारसूर के समीप बोधघाटी पहाड़ी से गिरते हुए क्रमश: 'बोधधारा', 'कपिलधारा', 'पाण्डवधारा', 'कृष्णाधारा', 'शिवधारा', 'बाणधारा' और 'शिवचित्र धारा' सात धाराएँ हैं।
▸ कहा जाता है कि यह भेड़ाघाट से भी सुन्दर जलप्रपात है।