छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (प्रीलिम्स) परीक्षा‚ 2013 सी-सैट (अध्यायवार विश्लेषण सहित व्याख्या) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उसके अंत में दिए हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर गद्यांश में दिये गये विवरण पर ही आधारित होने चाहिए। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत्त होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता‚ एक पारिवारिक असफलता‚ एक स्वभाव सम्बन्धी विषय के रूप में वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व। और फिर भी बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का अवगुण है। एक अन्यथा उच्च चरित्रवान माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। आप जानते हैं उन पुरुषों को जो लगभग परिपूर्ण होते हैं‚ एवं उन नारियों को जो पूर्णतया सम्पूर्ण रूप से होती हैं‚ सिवाय उनके आसानी से आलोड़ित हो जाने वाले उग्र स्वभाव के या अति संवेदनशील अर्थात्‌ शीघ्र ही उत्तेजित हो जाने वाले स्वभाव के। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दु:खद समस्याओं में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप‚ कोई भी सांसारिकता‚ कोई भी स्वर्ण का लोभ‚ कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना ईसाईयत विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कड़ुआ बना देने‚ जन समुदायों को तोड़ने‚ पवित्रतम रिश्तों नातों को नष्ट करने‚ घरों को बर्बाद करने‚ पुरुष और महिलाओं को मुरझा देने‚ बचपन से उसकी ताजगी‚ खिलखिलाहट छीन लेने‚ संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दु:खोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या‚ घमण्ड‚ अनुदारता‚ निर्दयता‚ स्वयं को सही समझने की प्रवृत्ति‚ भड़कीलापन‚ अड़ियलपन‚ उदासी – कमज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्व हैं। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मन:स्थिति वाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा।1. चिड़चिड़े स्वभाव के बारे में प्रचलित राय क्या है?

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Chattisgarh CGPSC Previous Year Question Paper: General Studies GS Paper-1 2013 — practice the complete quiz, review flashcards, or try a random question.


छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (प्रीलिम्स) परीक्षा‚ 2013 सी-सैट (अध्यायवार विश्लेषण सहित व्याख्या) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उसके अंत में दिए हुए प्रश्नों के उत्तर दीजिए। आपके उत्तर गद्यांश में दिये गये विवरण पर ही आधारित होने चाहिए। क्रोध को हम एक बहुत ही हानि रहित कमजोरी की तरह देखने के लिए प्रवृत्त होते हैं। इसे हम महज एक प्राकृतिक दुर्बलता‚ एक पारिवारिक असफलता‚ एक स्वभाव सम्बन्धी विषय के रूप में वर्णित करते हैं न कि किसी व्यक्ति के चरित्र का आकलन करने हेतु गम्भीरता से गणना में सम्मिलित करने का तत्व। और फिर भी बाइबल मानव स्वभाव के सर्वाधिक विनाशकारी तत्वों में से एक के रूप में इसकी भर्त्सना करती है। क्रोध की एक विशेषता यह है कि यह गुणवान लोगों का अवगुण है। एक अन्यथा उच्च चरित्रवान माने जाने वाले व्यक्ति पर यह अक्सर एक कलंक की तरह होता है। आप जानते हैं उन पुरुषों को जो लगभग परिपूर्ण होते हैं‚ एवं उन नारियों को जो पूर्णतया सम्पूर्ण रूप से होती हैं‚ सिवाय उनके आसानी से आलोड़ित हो जाने वाले उग्र स्वभाव के या अति संवेदनशील अर्थात्‌ शीघ्र ही उत्तेजित हो जाने वाले स्वभाव के। क्रोधी स्वभाव और उच्च नैतिक चरित्र के बीच में यह अनुकूलता आचार शास्त्र की सर्वाधिक विलक्षण एवं दु:खद समस्याओं में से एक है। किसी भी प्रकार का पाप‚ कोई भी सांसारिकता‚ कोई भी स्वर्ण का लोभ‚ कोई भी शराबखोरी या नशेबाजी समाज को इतना ईसाईयत विहीन नहीं बनाते जितना क्रोध बनाता है। जीवन को कड़ुआ बना देने‚ जन समुदायों को तोड़ने‚ पवित्रतम रिश्तों नातों को नष्ट करने‚ घरों को बर्बाद करने‚ पुरुष और महिलाओं को मुरझा देने‚ बचपन से उसकी ताजगी‚ खिलखिलाहट छीन लेने‚ संक्षिप्त में एक शुद्ध स्वयमेव दु:खोत्पादक शक्ति के रूप में क्रोध की सत्ता सर्वोपरि है। ईर्ष्या‚ घमण्ड‚ अनुदारता‚ निर्दयता‚ स्वयं को सही समझने की प्रवृत्ति‚ भड़कीलापन‚ अड़ियलपन‚ उदासी – कमज्यादा मात्रा में ये सब उग्र स्वभाव के ही तत्व हैं। इस प्रकार के स्वभाव के लिए स्वर्ग में सचमुच ही कोई स्थान नहीं है। इस प्रकार की मन:स्थिति वाला व्यक्ति स्वर्ग में स्थित सभी लोगों के लिए जीवन केवल यातनापूर्ण ही बनाएगा।<br />1. चिड़चिड़े स्वभाव के बारे में प्रचलित राय क्या है?






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